शनिवार (16.03.2013) को कक्षा चौथी व पांचवी को सामूहिक रूप से हिन्दी की व्याकरण पढा रहा था। एक लोकोक्ति ‘कंगाली में आटा गीला’ के बारे में एक कहानी के रूप में बता रहा था -
एक गरीब आदमी के पास खाने के लिए थोड़ा ही आटा था। वह रोटी बनाने के लिए आटे में पानी के डालता है तो पानी ज्यादा डाल देता है। अब वह व्यक्ति परेशान हो जाता है कि एक तो उसके पास धन नहीं है और ऊपर से आटा खराब हो गया।
इस पर कक्षा चौथी की रोशनी से बड़ी मासूमियत से कहा कि सर वो आदमी परेशान क्यो हो जाता है यदि आटे और पानी के मिश्रण को उबाल ले तो खाने लायक राबड़ी तो बन ही जाएगी। सारी कक्षा बालिका की प्रत्युत्पन्न मति की बात सुनकर ठहाके लगाने लगा।
सच में परेशानी में विवेक से निर्णय ले तो कठिनाई में छू मंतर हो सकती है।
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