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Thursday, June 27, 2013

बांसवाड़ा जिला जेल में बीके पंचमसिंह का व्याख्यान

‘सजा से शरीर दोषमुक्त होती है, आत्मा नहीं’
जिला जेल में बीके पंचमसिंह का व्याख्यान
बांसवाड़ा, 27 जून। किसी गलती अथवा दोष के लिए मिलने वाली सजा से शरीर चाहे दोषमुक्त हो जाता हो लेकिन हमारा अपना जो मूल स्वरूप आत्मा है वह दोषमुक्त नहीं होती है। यदि आत्मा को दोषमुक्त बनाना है तो सबसे पहले खुद से खुद की मुलाकात करनी होगी। इस दिशा में ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के जगह-जगह चलने वाले केन्द्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। यह विचार डकैत से अध्यात्म की राह पर आए ब्रह्मकुमार पंचमसिंह ने गुरुवार को बांसवाड़ा जिला कारागार में आयोजित व्याख्यान में व्यक्त किए। उन्होने कहा कि वे खुद 550 डाकूओं के गिरोह के सरदार थे और किसी समय में चंबल में उनके नाम का खौफ था लेकिन अपराधबोध के कारण मन में शांति नहीं थी जबकि धर्म, कर्म, पूजा-पाठ खूब करता था। जब ईश्वरीय साक्षात्कार के कारण ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ज्ञान प्रकाश ने जीवन को नई दिशा दी। इस अवसर पर जिला उपअधीक्षक भैरोसिंह शेखावत, बांसवाड़ा केन्द्र प्रभारी बीके सरोज दीदी, बीके कमला दीदी, बीके किशोर भाई आदि मौजुद थे।
परिस्थितियां मजबूत और अनुभवी बनाती है
व्याख्यान के दौरान बीके पंचमसिंह ने कहा कि व्यक्ति परिस्थितिवश क्रिया करता है जो अविवेक के कारण अपराध भी कर बैठता है। अत: परिस्थितियां व्यक्ति को अनुभवी बनाती है कि फिर कभी पूर्व में किया गया अपराध अथवा दोष नहीं दोहराऊंगा और यह संकल्प व्यक्ति को मजबूत बनाता है। उन्होने कहा कि जीवन में मर्यादा को पालन जरूरी है। बिना पवित्रता से भक्ति से भी शक्ति नहीं मिलती है। भला करेंगे तो खुद को भी भलाई मिलेगी। बीके कमला दीदी ने ‘कर सको तो खुद की महसूस करो गलतियो तो शिक्षक है यह जिन्दगी . . .’ कविता सुनाई। बीके सरोज दीदी ने कहा कि जीवन में मूल्यों की स्थापना करना तथा उन्हे जीवन पर्यंत पालन करना व्यक्ति को दानव से मानव और मानव से देवता बनाता है। बीके किशारे भाई ने कहा कि जो व्यक्ति जैसा बीज बोता है वैसे ही वृक्ष के फल खाता है। अंत में जिला जेल उप अधीक्षक भैरोसिंह शेखावत ने आभार जताया।

फोटो - बांसवाड़ा जिला कारागार में आयोजित ब्रह्मकुमार पंचमसिंह के व्याख्यान में मंचस्थ अतिथियों में जिला जेल उप अधीक्षक भैरोसिंह शेखावत, बीके सरोज दीदी, बीके कमला दीदी, बीके किशोर भाई तथा व्याख्यान सुनते कैदी।
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