.

Monday, April 13, 2009

ऊँट ने बुझाई प्यास


झूकने से बढ़ता है मान, होता है समस्याओं का निदान।
बाँसवाड़ा जिले के नयागाँव के निकट प्रख्यात लिमथान के श्री परशुराम मंदिरप्रांगण में लगे हेण्डपंप पर ऊँट ने कुछ इस कदर बुझाई अपनी प्यास। फोटो - भँवर गर्ग।

7 comments:

Chandan Kumar Jha said...
This comment has been removed by the author.
Chandan Kumar Jha said...

सुन्दर चित्र.

चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

गुलमोहर का फूल

Munim ji said...

इंसान का लेखन उसके विचारों से परिचित कराता है। ब्लोगिंग की दुनियां में आपका आना अच्छा रहा, स्वागत है. कुछ ही दिनों पहले ऐसा हमारा भी हुआ था. पिछले कुछ अरसे से खुले मंच पर समाज सेवियों का सामाजिक अंकेषण करने की धुन सवार हुई है, हो सकता है, इसमे भी आपके द्वारा लिखत-पडत की जरुरत हो?

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

रचना गौड़ ’भारती’ said...

सही कहा आपने.......ऊँट अगर सिर झुकाए तो लगताखै की मानो वह अपनी इज़्ज़त कर रहा हो.........चित्र भी अच्छा है......शुभकामनाएँ.........

दिल दुखता है... said...

हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका तहेदिल से स्वागत है...

उम्मीद said...

आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . लिखते रहिये
चिटठा जगत मैं आप का स्वागत है

गार्गी