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Thursday, April 10, 2014
Thursday, February 6, 2014
‘हर बार के हाँ को कहे ना’
‘हर बार के हाँ को कहे ना’
ः भँवरलाल गर्ग
‘यस सर’ के युग में नो कहे तो विफलता मिलेगी इस डर से हर कोई हाँ में हाँ मिलाता जाता है और इसी कारण परेशानियां भी पीछा नहीं छोड़ती है। कभी ना कहने की हिम्मत भी जूटा लेनी चाहिए।
पहले का समय और था जब हर कोई किसी की सहायता करता था और खुश भी रहता था। आज का युग बहुत बदल कर आगे निकल गया है। समय के साथ लोग बदल गए है। इस कारण किसी काम में सहयोग के लिए पूछना पड़ता है कि क्या मेरी सहायता करोगे? इसमें भी सभी हाँ तो कह देते है लेकिन काम पड़ने पर समयाभाव में सहायता नहीं कर पाते है।
यदि निर्णय लेकर ना कहने की हिम्मत भी जूटा ले तो परेशानियों से बचा जा सकता है। विवेकपूर्ण निर्णय लेकर ही हामी भरने से समय, श्रम और स्वास्थ्य तीनों अच्छे रहते है। कभी किसी को ना कहने पर थोड़ा असहजता तो होती ही है लेकिन बाद की परेशानियों से बचा जा सकता है।
युग के साथ आदतों में भी परिवर्तन लाना पड़ता है। यस मैन के दौर में थोड़ा ना कहने की भी जरूरत है लेकिन यदि फिर केवल ना कहने की ही आदत पड़ जाए फिर तो ऊपरवाला ही मालिक है।
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Wednesday, February 5, 2014
‘सबसे पहले पूरे करे अधूरे काम’
‘सबसे पहले पूरे करे अधूरे काम’
ः भँवरलाल गर्ग
हर व्यक्ति को समय समान रूप से मिला हुआ होता है। हर व्यक्ति को रोज़ 24 घंटे या यूं कहे कि 86, 400 क्षण ही मिलते है। फिर भी इतना समय व्यतीत होने के बाद कोई खुश में तो कोई नाखुश रहता है। अगले दिन भी अपनी नियमित चर्या के अनुसार जीवन जीने के बाद भी शाम को परिणाम वही मिलता है लेकिन फास्ट लाईफ स्टाईल के नाम पर इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
यदि समय रहते समय प्रबंधन का गुर सिख लिया जाए तो जीवन में खुशियां आने का क्रम निरंतर बना रहता है। इसके लिए जरूरी यह है कि समय का प्रबंधन किस प्रकार करते है। साथ ही किन कार्यों को प्रमुखता से लेकर आगे बढ़ते है।
व्यक्ति द्वारा निर्धारित किए गए मापदंड और उन पैमानों के अनुसार यदि वह चलता है एवं परेशानी होती है तो उसे शीघ्र ही इस पर विचार करना चाहिए। समय प्रबंधन के लिए सबसे पहले उन कार्यों को शीघ्र निबटाए जो बार-बार आपके मन में आकर आपको विचलित करते है। ये अधूरे पड़े कार्य व्यक्ति को दूसरे काम करने में मन लगने नहीं देते है। इसी कारण वह न तो जो नये काम सोचता है वह शुरू कर पाता है और ना ही पुराने अधुरे पड़े कार्यों को पूर्ण कर पाता है। इस कारण मन निरंतर परेशानी में पड़ा रहता है। समय प्रबंधन करने से जीवन प्रबंधन होने के साथ जीवन सुखमय हो जाता है।
Thursday, July 11, 2013
‘खूबियों से भरी कुछ खास, भंवर सर की क्लास’
‘खूबियों से भरी कुछ खास, भंवर सर की क्लास’
- प्राथमिक शिक्षक की अनुकरणीय पहल
- बच्चों के लिए खुद के बूते किया इंतजाम
बांसवाड़ा। सरकारी विद्यालय में पढ़ाई के शिकवे-शिकायत को लेकर निजी विद्यालय में जाने के मामले तो सुने, पढ़े और देखे होंगे लेकिन बांसवाड़ा जिले का एक प्राथमिक विद्यालय ऐसा भी है जहां के गुणात्मक स्तर से प्रभावित होकर अभिभावक अपने बच्चों को निजी विद्यालयों से निकालकर यहां दाखिला दिला रहे है। यह विद्यालय है बांसवाड़ा जिले की घाटोल पंचायत समिति का प्राथमिक विद्यालय बड़लिया। अभिभावकों को इस दिशा में प्रेरित करने में यहां कार्यरत प्राथमिक शिक्षक भंवरलाल गर्ग की काबिले तारीफ भूमिका रही है। गर्ग जो रचनात्मक शिक्षण के लिए राज्य में संचालित क्रियेटीव टीचर ऑफ राजस्थान की बांसवाड़ा जिला टीम के कम्प्यूटर एक्सपर्ट एवं तकनीकि दल के सदस्य भी है। उन्होने अपने स्तर पर प्रोजेक्टर सुविधा युक्त मोबाईल का इंतजाम करके एक ऐसी शिक्षण विधा को अपनाया है, जिससे ग्रामीण विद्यार्थियों में न केवल पढ़ाई के प्रति रूझान बढ़ रहा है बल्कि विद्यालय में प्रतिदिन के साथ पूरा समय ठहराव भी सुनिश्चित हुआ है। विद्यालय का नया सत्र शुरू होने के साथ उन्होने इस तकनीक को अपनाना शुरू कर दिया है नतीजतन पूरे गांव के अभिभावकों और बच्चों की जुबां पर इन दिनों एक ही जुमला सुनाइ देता है - खूबियों से भरी हुई कुछ खास है, भंवर सर की क्लास।
अधिकारियों की टीम पहुंची बड़लिया
बांसवाड़ा। प्राथमिक विद्यालय बड़लिया में कार्यरत कम्प्यूटर दक्ष शिक्षक भंवरलाल गर्ग द्वारा आधुनिक तकनीक के जरिए प्राथमिक स्तर पर शिक्षण के बारे में चर्चा एवं जानकारी मिलने के बाद प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी महेन्द्र त्रिवेदी, सर्व शिक्षा अभियान अतिरिक्त परियोजना समन्वयक डॉ. हरिशंकर मारू तथा घाटोल ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नवीनचंद्र मीणा बुधवार को आकस्मिक निरीक्षण के तौर पर बड़लिया पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होने शिक्षक गर्ग को अपने अलग ही अंदाज में पहली कक्षा के बच्चों को प्रोजेक्टर और मोबाईल में प्राथमिक शिक्षण के लिए अपलोड की गई सामग्री के जरिए अध्यापन कराते हुए देखा। उन्होने लगभग 20 मिनिट तक गर्ग की कक्षा एवं उनके शिक्षण में मनोयोग से डूबे पहली कक्षा के ग्रामीण विद्यार्थियों को देखा तो स्वयं भी अभिभूत हुए बिना नहीं रह सके। शिक्षण के दौरान गर्ग ने प्रोजेक्टर के माध्यम से इन विद्यार्थियों को हिन्दी वर्णमाला के ज्ञान में तकनीक और कौशल का जिस प्रकार से इस्तमाल करते हुए शिक्षण कराया तो उच्चाधिकारी कक्षा में सीखने की जिज्ञासा में पूरी तरह से तल्लीन विद्यार्थियों की एकाग्रता को सराहे बिना न रह सके। शिक्षण में गर्ग ने छात्र अध्यापक क्रिया को भी बखूबी अंजाम दिया। गीत शैली में वर्णमाला लिखने, पढऩे और सुनने के अभ्यास का बच्चों पर कुछ ही देर में ऐसा असर हुआ कि वाल्यूम ऑफ कर देने पर बच्चे चित्र देखकर खुद ही गा कर सुनाने लगे।
चुनौती यूं बनी चाहत
बांसवाड़ा। प्राथमिक विद्यालय बड़लिया में 12 विद्यार्थी कुछ निजी विद्यालयों से निकलकर प्रवेश पाने वालों में शामिल है। इस सत्र में इन विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बड़ी उम्मीदों से यहां के सरकारी स्कूल में उन्हे भर्ती कराया। विद्यालय के संस्था प्रधान हरेन्द्र सिंह सिसोदिया ने प्राईवेट स्कूल से निकलकर आए विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की उम्मीद पर खरे उतरने के लिए अपने विद्यालय के कम्प्यूटर तकनीक में निपुण शिक्षण भंवर गर्ग से चर्चा की। उन्होने इस बात को महसूस किया कि यदि इन बच्चों को पूर्व में अध्ययनरत विद्यालय के अनुरूप स्तर की शिक्षा नहीं दी जाएगी तो वे न तो विद्यालय में बने रहेंगे और न ही सरकारी स्कूल की छवि के बारे में अभिभावकों और बच्चों के मन में सकारात्मक सोच बनेगी। संस्थाप्रधान और शिक्षक दोनो के लिए यह उम्मीद चुनौती बन गई थी। गर्ग ने इस चुनौती को चाहन में तब्दील कर दिया और निजी स्तर पर प्रोजेक्टर की सुविधायुक्त मोबाईल खरीदकर एक ऐसी तकनीक से शिक्षण से शुरू किया ताकि निजी विद्यालय से अपने विद्यालय में पढऩे के लिए आए बच्चों को गुणात्मक स्तर बेहतरीन बना रहे। चुनौती को जहां चाह वहां राह परिवर्तित करने में संस्थाप्रधान सिसोदिया और शिक्षक गर्ग की भूमिका को ग्रामीण और निरीक्षण कर चुके अधिकारी दिल खोल कर सराहते है।
सीटीओआर का प्रोत्साहन
राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद के आयुक्त एवं क्रियेटिव टीचर ऑफ राजस्थान के संस्थापक भास्कर ए. सांवत के निर्देशन में राज्य के 33 जिलों में सीटीओआर नामक टीम काम कर रही है। शिक्षकों की यह एक ऐसी टीम है जो प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक में विद्यार्थियों को ई-कंटेंट के जरिए शिक्षण में सहायता करती है। बड़लिया के प्राथमिक शिक्षक भंवर गर्ग इस टीम के जिला सदस्य है और पिछले दिनों बांसवाड़ा में सीटीओआर की राज्य प्रभारी डी. कविता के निर्देशन में ई-कंटेंट पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में प्रशिक्षण भी पा चुके है। इसी से प्रेरणा लेकर उन्होने अपने विद्यालय में पहली से पांचवी तक के शिक्षण में कंप्यूटर तकनीक और प्रोजेक्टर के साथ ई-कंटेट को शुरूआती विद्यार्थी जीवन से ही लाभान्वित करने का बीड़ा उठाया है। उनकी इस पहल को सराहा जा रहा है। वे स्वयं कहते है सीटीओआर से जुडऩे के कारण उन्हे नई तकनीक और ई-कंटेंट से प्राथमिक स्तर पर शिक्षण के साथ बच्चों में प्रारंभिक काल से ही इस तकनीक के प्रति रूझान पैदा करने की प्रेरणा मिली है। प्राथमिक विद्यालय बड़लिया में मोबाईल में उपलब्ध प्रोजेक्टर के कई फायदे महसूस किए गए है। अमूमन बड़ी तकनी के प्रोजेक्टर के लिए बिजली, युपीएस, बैटरी आदि की अनिवार्यता रहती है लेकिन मोबाईल में प्रयुक्त प्रोजक्टर के लिए इन सभी चीजों के लिए मोहताज नहीं रहना पड़ता। मोबाईल की बैटरी एक घंटे शिक्षण के लिए पर्याप्त ऊर्जा प्रदान करती है। इस सुविधा के कारण बिजली न होने और युपीएस तथा बैटरी का अभाव भी कक्षा शिक्षण को बाधित नहीं करता है।
आयुक्त देखेंगे यह क्लास
क्रियेटीव टीचर ऑफ राजस्थान की राज्य प्रभारी डी. कविता तथा बांसवाड़ा डूंगरपुर के जिला प्रभारी प्रकाश पंड्या ने बताया कि प्राथमिक स्तर पर पूरे प्रदेश के लिए बड़लिया स्कूल की इस अनुकरणीय पहल के बारे में एस.एस.ए. आयुक्त भास्कर ए. सावंत को जानकारी दी गई है। उन्होने विद्यालय के संस्थाप्रधान और शिक्षक को इस अभिनव पहल के लिए बधाई दी है तथा ऑनलाईन इस प्रकारण के कक्षा शिक्षण के अवलोकन की इच्छा जताई है। रीडिंग कैंपेन के दौरान आयुक्त ने कभी भी बड़लिया प्राथमिक स्कूल में प्रोजेक्टर से शिक्षण की क्लास देखे जाने के बारे में सीटीओआर के पदाधिकारियों को निर्देशित किया है।
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Monday, May 6, 2013
ज्यों-ज्यों बढ़े गर्मी त्यों-त्यों खिले फूल
ज्यों-ज्यों बढ़े गर्मी त्यों-त्यों खिले फूल
प्रकृति के रंग भी निराले है। कुछ फूल तो तेज गर्मी में झुलस जाते है तो कुछ गर्मी की प्रचंडता के साथ खिल उठते है। कुछ ऐसे ही फूल बांसवाड़ा शहर में बढ़ते गर्मी के तापमान के साथ ही अपना सौन्दर्य बिखेर रहे है। बांसवाड़ा-दाहोद मार्ग पर ठीकरिया के निकट सडक़ के किनारे खिले अमलतास के फूल (फोटो 1 व 2) तथा बांसवाड़ा-डूंगरपुर मार्ग पर कॉलेज मैदान के निकट खिले गुलमोहर के फूल (फोटो 3 व 4) राहगीरों को अपनी ओर आकृष्ट कर रहे है। फोटो - भंवरलाल गर्ग, ठीकरिया
Thursday, March 28, 2013
वयोवृद्ध समाजसेवी एवं राजनीतिज्ञ शुक्ला का निधन
बांसवाड़ा, 28 मार्च। जाने-माने समाजसेवी एवं राजस्थान में पंचायतीराज व्यवस्था के प्रारंभिक काल के स्तम्भ जनप्रतिनिधि मणिशंकर शुक्ला निवासी ठीकरिया का गुरुवार को निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। पिछले कुछ दिनों से वे अस्वस्थ चल रहे थे। गुरुवार को उन्होने अंतिम सांस ली। ठीकरिया स्थित मोक्ष धाम पर गुरुवार को ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। पुत्र रूप में गोद लिए गए उनके दामाद मोहन लाल पंड्या व उनके दोहित्र मुकेश तथा निरंजन पंड्या ने उन्हे मुखाग्रि दी। उनकी अंतिम यात्रा में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों, राजनीतिक क्षेत्र की हस्तियां तथा धर्म एवं अध्यात्म जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए। शुक्ला बांसवाड़ा जिले के उन अग्रगण्य राजनीतिज्ञों में से थे जिन्हें राजस्थान में पंचायतीराज व्यवस्था की नींव रखे जाने के साथ ही आम सहमति से सरपंच चुना गया और दो दशक तक आम सहमति से वे ठीकरिया के सरपंच बने रहे। राजस्थान में पंचायतीराज व्यवस्था लागू होने से लेकर दो दशक तक शुक्ला ने ठीकरिया में पंचायत राज व्यवस्था के सुदृढीकरण तथा ग्रामीण एवं कृषि विकास के लिए प्रदेश स्तर पर इस पंचायत की ख्याति अर्जित करने में पूरी ऊर्जा लगाई तथा ठीकरिया पंचायत की लोकप्रियता प्रदेश और दिल्ली तक पहुंची।
बाबूजी जोशी के निकटस्थ राजनीतिज्ञ
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूजी हरिदेव जोशी के निकटस्थ राजनीतिज्ञ मित्रों में अग्रगण्य शुक्ला के प्रति जोशीजी का सद्भाव जिले और राज्य में ख्यात रहा। यह दुर्योग ही कहा जाएगा कि शुक्ला का निधन भी बाबूजी की पुण्यतिथि 28 मार्च को हुआ। मुख्यमंत्री के पद पर रहे हो या विपक्ष में हरिदेव जोशी बांसवाड़ा यात्रा के दौरान शुक्ला से जरूरी विषयों और गहन, गंभीर मुद्दों पर अनिवार्य रूप से चर्चा करते थे। कई मामलों में वे शुक्ला के साथ निर्णयात्मक स्थिति में उन्हे अपना विश्वासपात्र मानकर उनसे सलाह भी लेते थे। एक जनसमर्पित सरपंच के साथ-साथ सर्वहारा वर्ग के हितैषी समाजसेवी के रूप में विशिष्ठ छवि के कारण शुक्ला की पहचान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी के जेहन में भी एक स्थापित एवं समर्पित कार्यकर्ता के रूप में सदैव बनी रही। राजस्थान के कांग्रेस और कांग्रेस से इतर मुख्यमंत्रियों ने शुक्ला को एक आदर्श सरपंच के रूप में सदैव स्थान दिया।
वर्तमान का विकास शुक्ला की दूरदर्शिता की देन
बांसवाड़ा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर आम और खास, स्थानीय और परदेसी मुसाफिरों, उद्योगपतियों और व्यवसायियों को नजर आने वाला वर्तमान का विकास शुक्ला की दूरदर्शिता की देन माना जाता है। बोरवट में कृषि अनुसंधान केन्द्र के रूप में आधुनिक अन्नपूर्णा का तीर्थ क्षेत्र हो या ठीकरिया ग्राम पंचायत मुख्यालय पर राजस्थान का पहला सुव्यवस्थित आकर्षक ग्राम पंचायत भवन इन निर्माण कार्यों तथा विकास के आधार स्तम्भों की नींव शुक्ला की देन है। वे सहज, सरल और समर्पित सरपंच के साथ-साथ गांव और क्षेत्र के विकास के पुरोधा बने रहे। महानरेगा जैसी योजनाओं की गंध भी जिस जमाने में नसीब नहीं थी उस हालात में शुक्ला ने इतनी निष्ठा और ईमानदारी से काम किया कि हर कोई उनकी इस ईमानदार राजनीतिज्ञ की छवि का कायल रहा। दशकों तक सरपंच बने रहने के बावजूद वृद्धावस्था तक उनके पास साधन, सुविधाओं के नाम पर महज एक मोपेड़ थी जिस पर वे दूरी नापा करते थे।
हर वक्त एवररेडी
शुक्ला केवल राजनीतिज्ञ नहीं थे अपितु इससे कहीं ज्यादा उनकी छवि ठीकरिया और आस-पास के गांवों में समाजसेवी के रूप में ख्यात थी। गांव की अत्यंत गरीब का बच्चा बीमार हो या फिर उसका पालनहार पशु उसे लेकर चिकित्सक के पास जाना और व्यवस्थित उपचार होने तक उसका सहारा बनकर उसका साथ देना उनकी आदत और दिनचर्या में शुमार था। आज भी गांव के वृद्ध जिन्हे विषम परिस्थितियों में शुक्ला का साथ और सहारा मिला वे नम आँखों से उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना नहीं भुलते।
सदियों तक मील का पत्थर बनी रहेगी . . .
देश और दुनिया बेटियों को लक्ष्मी स्वरूपा मानकर उनके संरक्षण के आदर्श का आज जिस दृढ़ता के साथ कार्य करने को प्राथमिकता दे रही है उस आदर्श को शुक्ला ने अब से साठ साल पहले स्थापित कर दिया। अपनी एकलौती संतान के रूप में बेटी उर्मिला को ही उन्होने अपने पूरे सांसारिक जीवन का आधार मानकर पारिवारिक जीवन जीया। उनके इस आदर्श को न केवल विप्र समाज अपितु जिले के प्रत्येक समुदाय ने सराहा और 6 दशक पूर्व उनके द्वारा स्थापित कन्या संरक्षण की मिसाल को अनुकरणीय व्यवस्था मानते हुए जनजाति क्षेत्र में एक राजनीतिज्ञ द्वारा स्थापित आदर्श को मील के पत्थर के रूप में याद रखा जाएगा। वे कहते भी थे कि मेरी यह बेटी कई आदर्श पुत्रों से बढक़र है। पुत्री ने भी अपने पिता के इस विश्वास को जीता और एक आदर्श पुत्री के रूप में जीवन भर उनकी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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Friday, March 8, 2013
महिला दिवस पर बांसवाड़ा में निकाली विशाल रैली
‘बेटी नहीं बचाओगे तो बहू कहां से लाओगे’
बांसवाड़ा, 8 मार्च। शुक्रवार को विश्व महिला दिवस के उपलक्ष में ‘सशक्त नारी समर्थ समाज’ थीम पर आधारित रैली निकाली, जिसमें सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया। यह रैली राजस्थान राज्य भारत स्काउट व गाइड तथा स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में निकाली गई। यह रैली सुबह आठ बजे राती तलाई स्थित भारत माता मंदिर मैदान से शुरू हुई। कार्यवाहक जिला कलक्टर वृद्धिचंद गर्ग व नगर परिषद सभापति राजेश टेलर ने रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली के आगे-आगे फखरीया विद्यालय का बैंड अपनी समधुर ध्वनियां बिखेरते हुए चल रहा था। रैली मोहन कॉलोनी, कलेक्ट्री चौराहा, नई आबादी, आज़ाद चौक, चंद्रपॉल गेट होते हुए नगर परिषद प्रांगण में पहुंचकर सभा में तब्दील हो गई।
कोमल है कमजोर नहीं है नारी - जोशी
महिला वर्ग ने हर युग में कमजोर होते समाज को नवीन दिशा दी है। महिलाएं दया, प्रेम और करूणा का रूप जरूर है, नारी कोमल है पर कमजोर नहीं है। उक्त विचार राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय चंद्रपॉलगेट की प्रधानाचार्या मीनाक्षी जोशी ने व्यक्त किए। उन्होने कहा कि वर्तमान समय में भी नारी शक्ति को जब भी अवसर मिले है उसने अपनी क्षमता का परिचय दिया है। कार्यक्रम में भूवनेश्वरी मालोत, प्रीति दोसी ने भी संबोधित किया। आरंभ में स्वागत सीओ स्काउट दीपेश शर्मा ने किया तथा आभार सीओ गाइड विजय लक्ष्मी वर्मा ने माना। संचालन राउप्रावि मोहन कॉलोनी के संस्थाप्रधान ब्रजमोहन द्विवेदी ‘तूफान’ ने किया। अंत में सामूहिक राष्ट्रगान गाया गया। अल्पाहार वितरण के साथ सभा का विसर्जन हुआ। इस अवसर पर मोहनलाल पंड्या, भगवानलाल राठौड़, अनरुद्दीन शेख, मणिलाल शर्मा, राजमल जैन, रेखा कंसारा, भंवरलाल गर्ग, अनिल जोशी, विपिन ठाकोर आदि मौजुद थे।
रैली में कतारबद्ध होकर चली शिक्षिकाएं
विश्व महिला दिवस पर आयोजित विशाल रैली में विद्यालयी शिक्षिकाओं ने कदम से कदम मिलाते हुए रैली में कतारबद्ध चली। शिक्षिकाएं सीओ गाइड विजय लक्ष्मी रोहिला के निर्देशन में रैली के आरंभ से समापन तक चलते हुए नारे लगा रही थी। विश्व महिला दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में पीएमओ डॉ. महेशचंद्र आमेटा, नर्सिंग अधीक्षक शंकरलाल यादव, अरविंद चौबीसा, कोतवाली सीआई कानसिंह भाटी, एएसआई नंदलाल, जितेन्द्र भट्ट, नीरज त्रिवेदी, शैलेन्द्र सराफ, राहुल सराफ, निलेष सेठ, अपर उप जिला शिक्षा अधिकारी शर्मिला शर्मा, दक्षा जोशी, रीना चौबीसा, सुलाचना दोसी, प्रीति दोसी, ज्योत्सना द्विवेदी, मीना सिंहा, नीना महाजन, शहचान प्रीति, शीतल मेहता, लतेश्वरी आदि ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त सभी स्थानीय संघ स्तर पर रैली निकाली गई।
फोटो - 1
शुक्रवार को विश्व महिला दिवस अवसर पर भारतमाता मैदान से शुरू हुई सशक्त नारी समर्थ समाज थीम पर आधारित रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते कार्यवाहक जिला कलक्टर वृद्धिचंद गर्ग व नगर परिषद सभापति राजेश टेलर तथा अन्य। फोटो - भंवरलाल गर्ग
फोटो - 2
विश्व महिला दिवस पर निकाली गई रैली में विद्यालयी शिक्षिकाएं सीओ गाइड विजय लक्ष्मी वर्मा के निर्देशन में कदम से कदम मिलाकर चलते हुए। फोटो - भंवरलाल गर्ग
फोटो - 3
रैली के उपरांत नगर परिषद प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते राबाउमावि चंद्रपोल गेट की प्रधानाचार्या मीनाक्षी जोशी। फोटो - भंवरलाल गर्ग
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Wednesday, March 6, 2013
Monday, February 4, 2013
आजकल तो फ्री स्टाइल सरकार है!
गाजर की पूंगी उर्फ फ्री स्टाइल सरकार
श्याम-अश्याम
आजकल तो फ्री स्टाइल सरकार है!
तू भी लगा धक्का!
तेरा भाई भी लगाए धक्का!!
चलने दे धक्कम मुक्का!!!
यहां कोई किसी की चिंता नहीं करता
न किसी को किसी की दरकार है!
आजकल तो फ्री स्टाइल सरकार है!
तू भी खा!
तेरा भाई भी खाये!!
ये गाजर की पूंगी!
तू बजा!
तेरा भाई भी बजाये!!
बजाते-बजाते
तू थक जाय
तो तू खा जा!
तेरा भाई खा जाये!!
यहां कोई किसी की चिंता नहीं करता
न किसी को किसी की दरकार है!
आजकल तो फ्री स्टाइल सरकार है!
चुनाव के पहिले
महात्मा गांधी जिन्दाबाद!
चुनाव के वक्त
अपनी पार्टी जिन्दाबाद!!
चुनाव के बाद
अपनी कुर्सी जिन्दाबाद!!
अजब तेरी कुदरत
अजब तेरा खेल!
छछूंदर के सिर में
चमेली का तेल
नेता को हार!
जनता को मार!
मीनिस्टर को मावा!
मुंशी को मिश्री!!
मास्टर को मक्का!
और जनता को धक्का!
तो तू भी लगा धक्का
तेरा भाई भी लगाये धक्का!!
चलने दे धक्कम मुक्का!!!
यहां कोई किसी की चिंता नहीं करता
न किसी को किसी की दरकार है!
आजकल तो फ्री स्टाइल सरकार है!
दिल्ली की सत्ता बिल्ली
नचा रही बंदर!
कुर्सी की लालच में
नाच रहे बन्दर!!
दिल्ली को छींक आवे
जयपुर है हांक भरे!
भोपाल गोपाल बन
कठपुतली नाच करें!!
तिलचट्टू चाट रहे!
छुट भैया बांट रहे!!
तौबे की डेकची
कलई की भड़क
जनता को पगडंडी
नेता को सड़क!!
राज पोपा बाई का
लेखा राई-राई का!!
हाकिम करे सो न्याय!
बाकी सब अन्याय!!
अंधेर नगरी
अनबुझ राजा
टके सेर भाजी
दुनिया मुंह से खाती है
तू आंख से खा
नाक से खा!
आजू से खा,
बाजू से खा!!
उपर से खा, सरकार से खा
नीचे से खा, जनता से खा
खा सके उतना खा
वरना तू पछतायेगा
ये राज फिर नहीं आयेगा!
क्योंकि -
आजकल तो चारो तरफ फैला
रिश्वत का व्यापार है।
ये तो फ्री स्टाइल सरकार है!
तू भी लगा धक्का!
तेरा भाई भी लगाए धक्का!!
चलने दे धक्कम मुक्का!!!
यहां कोई किसी की चिंता नहीं करता
न किसी को किसी की दरकार है!
आजकल तो फ्री स्टाइल सरकार है!
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देश पहले! फिर हम! पार्टी बाद में!
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Wednesday, January 9, 2013
Friday, November 30, 2012
Thursday, September 27, 2012
बड़लिया में विश्व पर्यटन दिवस पर समारोह
पर्यटन आर्थिक विकास का प्रमुख आधार - जिला कलक्टर
वागड़ का पर्यटन समृद्ध और प्रख्यात
बड़लिया में विश्व पर्यटन दिवस पर समारोह
बांसवाड़ा, 27 सितम्बर। जिला कलक्टर कुंज बिहारी गुप्ता ने कहा है कि पर्यटन विकास किसी भी देश और प्रदेश के आर्थिक विकास का प्रमुख आधार होता है। वर्तमान समय में पर्यटन केवल उद्योग नहीं है अपितु यह देश और प्रदेश की सांस्कृति धरोहर का सूचक है। जिला कलक्टर गुरुवार को विश्व पर्यटन दिवस पर बड़लिया ग्राम पंचायत स्थिति राजीव गांधी भारत निर्माण सेवा केन्द्र में माध्यमिक शिक्षा विभाग आईसीटी प्रकोष्ठ तथा राजकीय प्राथमिक विद्यालय बड़लिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह को मुख्य अतिथि पद से संबोधित कर रहे थे। जिला कलक्टर ने कहा वागड़ का पर्यटन समृद्ध और विश्व में प्रख्यात है। यहां पुरा सम्पदा की अनमोल धरोहर है तो आधुनिक पर्यटन भी आकर्षण का केन्द्र है। गुप्ता ने कहा कि पर्यटकों को आकर्षित किए जाने और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा दिए जाने के लिए सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। इन स्थलों को न केवल सुरक्षित और संरक्षित रखे जाने की आवश्यकता है बल्कि प्रमुख पर्यटन केन्द्रों के आसपास स्वच्छ माहौल और सुगम पहुंच भी आवश्यक है। पर्यटन विकास के लिए शिक्षा विभागीय प्रयासों की सराहना की और कहा कि इस प्रकार की सक्रियता और सहभागिता ही पर्यटन उद्योग को निरंतरता और गतिशीलता प्रदान कर सकती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम पंचायत सरपंच लक्ष्मणलाल कटारा ने की। शैक्षिक प्रकोष्ठ अधिकारी माध्यमिक शिक्षा के प्रकाश पंड्या, घाटोल ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नवीनचंद्र मीणा, जिला पर्यटन अधिकारी अनिल तलवाडिय़ा विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम के दौरान उपभोक्ता संरक्षण परिषद के सदस्य दीपक श्रीमाल भी मौजुद थे।
राजीव गांधी सेवा केन्द्र बना सजीव प्रसारण केन्द्र
राजीव गांधी सेवा केन्द्रों पर सौर ऊर्जा से संचालित उपकरणों का उपयोग कर इन सेवा केन्द्रों को शिक्षा और चेतना केन्द्र के रूप में विकसित किए जाने की इस पहल ने एक नया संदेश दिया। विश्व पर्यटन दिवस पर आयोजित समारोह के शुरू में ही अतिथियों सहित सभी की निगाहें टकटकी लगाए प्रोजेक्ट स्क्रीन की ओर लगी रही। इस समारोह के लिए आयोजक संस्थाओं ने बांसवाड़ा के प्रमुख पर्यटन केन्द्रों और आस्था स्थलों के सजीव प्रसारण के इंतजाम किए थे। लगभग 300 वर्ष पुराने मनोकामना पुर्ति दायक कल्प वृक्ष स्थल पर लगाए गए कैमरों के जरिए समारोह स्थल पर कल्पवृक्ष दर्शन का सजीव प्रसारण किया गया। यहीं से आधुनिक जल तीर्थ कागदी पिक अप वीयर का विहंगम दृश्य दिखाया गया। समारोह के समापन पर जब प्रमुख तीर्थ स्थल सांई बाबा मंदिर के भीतर पूजा अर्चना दर्शनार्थियों की कतारों, सांई बाबा की प्रतिमा एवं बाह्य दृश्य का प्रसारण किया गया तो राजीव गांधी सेवा केन्द्र सभागार जयकारों से गूंज उठा। ग्रामीण विद्यार्थियों के साथ ही गांव से आए जनप्रतिनिधियों और अभिभावको के लिए अपने गांव में बैठकर इन स्थलों का सजीव दर्शन कौतूहल के साथ आस्था का ज्वार उमड़ा गया। हर कोई इस आधुनिक तकनीक से जिले के पर्यटन स्थलों को अपनी आंखों के सामने देखकर खुश नज़र आया। इसी दौरान विजय गर्ग के निर्देशन में दीपिका एवं दल द्वारा बेटी बचाओं अभियान को समर्थन देने वाली नृत्य प्रस्तुति दी। बांसवाड़ा जिले के तीस से अधिक पर्यटन स्थलों की पॉवर प्रोजेक्ट द्वारा भंवरलाल गर्ग द्वारा प्रस्तुति दी गई। कल्पवृक्ष, कागदी पिक अप वियर एवं श्री सांई मंदिर दर्शन के सजीव प्रसारण में बांसवाड़ा के इन केन्द्रों पर विपिन चंद्र कलाल का सहयोग रहा।
कार्यक्रम में यह रहे मौजुद
कार्यक्रम के दौरान नोड़ल अधिकारी लियाकत अली, नौका उप्रावि संस्थाप्रधान लालजी पाटीदार, दीपक मसार, रामावि बड़लिया के प्रहलाद सिंह राठौड़, नरेन्द्र सिंह राव, जयंतीलाल पंचाल, रकमा मीणा, राप्रावि बड़लिया के हरेन्द्र सिंह सिसोदिया, दीपक दोसी, भंवरलाल गर्ग, विमिता कोठारी, चेतना जोशी, देवबाला मालवीया सहित ग्राम पंचायत बड़लिया सरपंच लक्ष्मण काटारा, उपसरपंच यदुनाथ सिंह चुंडावत, वार्ड पंच नागेन्द्र सिंह सहित बड़लिया ग्रामपंचायत के समस्त वार्ड पंच, सचिव शारदा एवं अमरेंग भाई पटेल, मोहनलाल भोई, बबलु भोई, मईड़ा भोई, रूपा भाई, भुरा भाई सुथार, भारता पटेल, गटुलाल पटेल, सुरेश कलाल, शैलेन्द्र सिंह, सुखलाल भोई, लक्ष्मण भोई, विठला भोई, खोमा पटेल, मीनाक्षी गर्ग आदि मौजुद थे। आरंभ में अतिथियों का स्वागत राप्रावि के संस्थाप्रधान हरेन्द्र सिंह सिसोदिया ने किया। संचालन अनिल अकेला ने किया जबकि आभार रामावि के नरेन्द्र सिंह राव ने माना। पर्यटन विभाग की ओर से विद्यालयी छात्र-छात्राओं व ग्रामीणों को बांसवाड़ा जिले के पर्यटन स्थालों की जानकारी देने वाले ब्रोशर का वितरण किया गया।
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बांसवाड़ा फोटो - 1
विश्व पर्यटन दिवस पर बड़लिया स्थित राजीव गांधी सेवा केन्द्र पर दिखाई गई सजीव प्रस्तुति को निहारते जिला कलक्टर कुंजबिहारी गुप्ता।
बांसवाड़ा फोटो - 2
विश्व पर्यटन दिवस पर बड़लिया में आयोजित कार्यक्रम में बांसवाड़ा के पर्यटन स्थलों की प्रोजेक्टर से प्रस्तुति देते लेखक शिक्षक भंवरलाल गर्ग।
बांसवाड़ा फोटो - 3
पर्यटन दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थी, ग्रामीण और अभिभावक।
Sunday, June 3, 2012
स्ट्रगल और सफलता एक साथ
स्ट्रगल और सफलता एक साथ
एकजूटता है कामयाबी का मंत्र
बांसवाड़ा। कहते है सफलता कड़ी मेहनत और ऊपरवाले के आशीर्वाद बिना नहीं मिलती है लेकिन देने वाला जब भी देता, देता छप्पर फाड़ के। कुछ ऐसा ही वाकया जनजाति बाहुल्य बांसवाड़ा के तीन मित्रों के साथ हुआ। इनकी दोस्ती की मिसाल, संघर्ष काल व एक साथ मिली सफलता इनकी एकजूटता का पर्याय बन गई है। इन दिनों में इन तीन मित्रों को मिली सफलता सबकी जुबान पर है। किसी फिल्मी कहानी सी लगने वाली यह दासतां हकीकत है। बांसवाड़ा जिले की गढ़ी तहसील के निकट बोरी गांव निवासी नितीन/भगवतीलाल खराड़ी, ठीकरिया निवासी खुशपाल/नटवरलाल गर्ग तथा परतापुर के निकट रहने वाले जगदीश चंद्र/अमरूजी डामोर एक जिले के निवासी होते हुए भी आज से लगभग 7 साल पहले एक-दूसरे को नहीं जानते थे लेकिन जब स्नातक करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए जिले से बाहर गए तो संभाग मुख्यालय उदयपुर में इनका परिचय हुआ जो गहरी दोस्ती में बदला और बाद में यह तीनों एक ही कमरे में साथ-साथ रहने लगे। इन्होंने इनका अध्ययन व संघर्ष एक साथ ही किया। उदयपुर व जयपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हमेशा एक कमरे में साथ ही रहे।
स्ट्रगल और सफलता एक साथ
जब इनका संघर्ष एक साथ रहा तो ईश्वर ने सफलता की सौगात भी सत्र 2012 में एक साथ दी। नितीन खराड़ी का चयन कनिष्ठ वाण्ज्यििक अधिकारी के रूप में उदयपुर में हुआ है तो खुशपाल गर्ग का चयन मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय में अंग्रेजी विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में हुआ है। जगदीश चंद्र डामोर का चयन अंग्रेजी विषय के व्याख्याता पद पर हुआ है।
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Tuesday, November 23, 2010
तापमामी में पारे की तरह दुबका शहर
बांसवाड़ा, 23 नवम्बर। पिछले दो दिनों से चल रहे मावठ के दौर से शहरवासी तापमापी के पारे की तरह दुबक रहे हैं। सोमवार रात और मंगलवार की सबुह को हुई तेज बारीश के दौर से शहर का तापमान बहुत कम हो चुका है। इस कारण तापमापी में पारा भी दुबका हुआ है और शहरवासी भी। आमजन अति आवश्यक कामों को निबटाने के लिए बड़ी सावधानी से बाहर निकलते है। विद्यालयों को जाने वाले बच्चों को परिवारजन अच्छी तरह से ‘पैक’ करके भेजते है। बांसवाड़ा जिले में मावठ का दौर दूसरे दिन मंगलवार को भी जारी रहा। मंगलवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मावठ की बरसात का दौर बना रहा। मंगलवार सवेरे आठ बजे समाप्त हुए पिछले चौबीस घण्टे में बांसवाड़ा जिले में 6.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसे मिलाकर बांसवाड़ा जिले में इस वर्ष अब तक 625.2 मिमी बारिश हो चुकी है। जिले में मंगलवार सवेरे समाप्त हुए पिछले चौबीस घण्टे में चौदह स्थानों पर स्थापित वर्षा मापी केन्द्रों के अनुसार सर्वाधिक 20 मिमी बारिश केसरपुरा में तथा सबसे कम दो मिमी बारिश भूंगड़ा, लोहारिया, अरथुना, शेरगढ़ तथा सल्लोपाट में दर्ज हुई जबकि कुशलगढ़ वर्षा मापी केन्द्र पर बरसात का आंकड़ा शून्य रहा। बांसवाड़ा में 17, दानपुर में 10, घाटोल में 4, जगपुरा में 7, गढ़ी में 6, बागीदौरा में 4 तथा सज्जनगढ़ में नौ मिमी बारिश दर्ज की गई। अचानक मौसम में आए इस बदलाव की वजह से गर्म ऊनी वस्त्रों की तिब्बतियों द्वारा लगाई दुकानों पर मंगलवार को खासी भीड़ देखी गई।
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Monday, May 11, 2009
People in date's (Khajoor) shelter खजूर की छाया में बैठे एक परिवार का दृश्य।

खजूर की छाया में बैठे एक जनजाति परिवार का दृश्य।
कौन कहता है खजूर नहीं देती है लोगों को परछाई,
गौर से एक बार इस चित्र को देखो तो भाई।
खेतों में काम करने के बाद दोहपर के समय खेतों में खजूर की छाया में
ही खाट लगाकर विश्राम करते एक परिवार के दृश्य को कैमरे में कैद
किया ठीकरिया के छायाकार भँवर गर्ग ने।
A family get shelter under date (khajoor)'s tree. This date or khajoor tree known as unshelterable but this nice image is taken by Bhavar garg.
Friday, May 8, 2009
माँ तुम महान हो।
Monday, April 20, 2009
Tree of Date and Pipal (Khajoor and Peepal)
Monday, April 13, 2009
ऊँट ने बुझाई प्यास
द्विमुखी हेण्डपंप।
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