बांसवाड़ा, 28 मार्च। जाने-माने समाजसेवी एवं राजस्थान में पंचायतीराज व्यवस्था के प्रारंभिक काल के स्तम्भ जनप्रतिनिधि मणिशंकर शुक्ला निवासी ठीकरिया का गुरुवार को निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। पिछले कुछ दिनों से वे अस्वस्थ चल रहे थे। गुरुवार को उन्होने अंतिम सांस ली। ठीकरिया स्थित मोक्ष धाम पर गुरुवार को ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। पुत्र रूप में गोद लिए गए उनके दामाद मोहन लाल पंड्या व उनके दोहित्र मुकेश तथा निरंजन पंड्या ने उन्हे मुखाग्रि दी। उनकी अंतिम यात्रा में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों, राजनीतिक क्षेत्र की हस्तियां तथा धर्म एवं अध्यात्म जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए। शुक्ला बांसवाड़ा जिले के उन अग्रगण्य राजनीतिज्ञों में से थे जिन्हें राजस्थान में पंचायतीराज व्यवस्था की नींव रखे जाने के साथ ही आम सहमति से सरपंच चुना गया और दो दशक तक आम सहमति से वे ठीकरिया के सरपंच बने रहे। राजस्थान में पंचायतीराज व्यवस्था लागू होने से लेकर दो दशक तक शुक्ला ने ठीकरिया में पंचायत राज व्यवस्था के सुदृढीकरण तथा ग्रामीण एवं कृषि विकास के लिए प्रदेश स्तर पर इस पंचायत की ख्याति अर्जित करने में पूरी ऊर्जा लगाई तथा ठीकरिया पंचायत की लोकप्रियता प्रदेश और दिल्ली तक पहुंची।
बाबूजी जोशी के निकटस्थ राजनीतिज्ञ
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूजी हरिदेव जोशी के निकटस्थ राजनीतिज्ञ मित्रों में अग्रगण्य शुक्ला के प्रति जोशीजी का सद्भाव जिले और राज्य में ख्यात रहा। यह दुर्योग ही कहा जाएगा कि शुक्ला का निधन भी बाबूजी की पुण्यतिथि 28 मार्च को हुआ। मुख्यमंत्री के पद पर रहे हो या विपक्ष में हरिदेव जोशी बांसवाड़ा यात्रा के दौरान शुक्ला से जरूरी विषयों और गहन, गंभीर मुद्दों पर अनिवार्य रूप से चर्चा करते थे। कई मामलों में वे शुक्ला के साथ निर्णयात्मक स्थिति में उन्हे अपना विश्वासपात्र मानकर उनसे सलाह भी लेते थे। एक जनसमर्पित सरपंच के साथ-साथ सर्वहारा वर्ग के हितैषी समाजसेवी के रूप में विशिष्ठ छवि के कारण शुक्ला की पहचान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी के जेहन में भी एक स्थापित एवं समर्पित कार्यकर्ता के रूप में सदैव बनी रही। राजस्थान के कांग्रेस और कांग्रेस से इतर मुख्यमंत्रियों ने शुक्ला को एक आदर्श सरपंच के रूप में सदैव स्थान दिया।
वर्तमान का विकास शुक्ला की दूरदर्शिता की देन
बांसवाड़ा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर आम और खास, स्थानीय और परदेसी मुसाफिरों, उद्योगपतियों और व्यवसायियों को नजर आने वाला वर्तमान का विकास शुक्ला की दूरदर्शिता की देन माना जाता है। बोरवट में कृषि अनुसंधान केन्द्र के रूप में आधुनिक अन्नपूर्णा का तीर्थ क्षेत्र हो या ठीकरिया ग्राम पंचायत मुख्यालय पर राजस्थान का पहला सुव्यवस्थित आकर्षक ग्राम पंचायत भवन इन निर्माण कार्यों तथा विकास के आधार स्तम्भों की नींव शुक्ला की देन है। वे सहज, सरल और समर्पित सरपंच के साथ-साथ गांव और क्षेत्र के विकास के पुरोधा बने रहे। महानरेगा जैसी योजनाओं की गंध भी जिस जमाने में नसीब नहीं थी उस हालात में शुक्ला ने इतनी निष्ठा और ईमानदारी से काम किया कि हर कोई उनकी इस ईमानदार राजनीतिज्ञ की छवि का कायल रहा। दशकों तक सरपंच बने रहने के बावजूद वृद्धावस्था तक उनके पास साधन, सुविधाओं के नाम पर महज एक मोपेड़ थी जिस पर वे दूरी नापा करते थे।
हर वक्त एवररेडी
शुक्ला केवल राजनीतिज्ञ नहीं थे अपितु इससे कहीं ज्यादा उनकी छवि ठीकरिया और आस-पास के गांवों में समाजसेवी के रूप में ख्यात थी। गांव की अत्यंत गरीब का बच्चा बीमार हो या फिर उसका पालनहार पशु उसे लेकर चिकित्सक के पास जाना और व्यवस्थित उपचार होने तक उसका सहारा बनकर उसका साथ देना उनकी आदत और दिनचर्या में शुमार था। आज भी गांव के वृद्ध जिन्हे विषम परिस्थितियों में शुक्ला का साथ और सहारा मिला वे नम आँखों से उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना नहीं भुलते।
सदियों तक मील का पत्थर बनी रहेगी . . .
देश और दुनिया बेटियों को लक्ष्मी स्वरूपा मानकर उनके संरक्षण के आदर्श का आज जिस दृढ़ता के साथ कार्य करने को प्राथमिकता दे रही है उस आदर्श को शुक्ला ने अब से साठ साल पहले स्थापित कर दिया। अपनी एकलौती संतान के रूप में बेटी उर्मिला को ही उन्होने अपने पूरे सांसारिक जीवन का आधार मानकर पारिवारिक जीवन जीया। उनके इस आदर्श को न केवल विप्र समाज अपितु जिले के प्रत्येक समुदाय ने सराहा और 6 दशक पूर्व उनके द्वारा स्थापित कन्या संरक्षण की मिसाल को अनुकरणीय व्यवस्था मानते हुए जनजाति क्षेत्र में एक राजनीतिज्ञ द्वारा स्थापित आदर्श को मील के पत्थर के रूप में याद रखा जाएगा। वे कहते भी थे कि मेरी यह बेटी कई आदर्श पुत्रों से बढक़र है। पुत्री ने भी अपने पिता के इस विश्वास को जीता और एक आदर्श पुत्री के रूप में जीवन भर उनकी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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