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Sunday, April 14, 2013

जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि 7 को बांसवाड़ा आएंगे


जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि 7 को बांसवाड़ा आएंगे
दो दिन प्रवचन, देव दर्शन के कार्यक्रम
बांसवाड़ा, 14 अप्रेल। जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरिजी महाराज आगामी 7 मई को बांसवाड़ा आएंगे। वे दो दिन के अपने प्रवास में दोनो ही दिन सत्संग प्रवचन करेंगे तथा यहां के प्रमुख मंदिरों तथा शक्तिपीठ त्रिपुरा सुंदरी में दर्शन व पूजा अचर्ना कर राष्ट्र की खुशहाली के लिए प्रार्थना करेंगे। जूना पीठाधीश्वर के दो दिवसीय बांसवाड़ा यात्रा कार्यक्रम को लेकर प्रभु प्रेमी संघ बांसवाड़ा ने व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी है। संघ के जिलाध्यक्ष एडवोकेट लक्ष्मीकांत त्रिवेदी ने बताया कि जूना पीठाधीश्वर के 7-8 मई को बांसवाड़ा प्रवास के दौरान सत्संग प्रवचन एवं अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रमों की तैयारियों को लेकर प्रभुप्रेमी संघ के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों एवं अनुयायियों की बैठक 20 अप्रेल शनिवार को सुबह 10 बजे बायतालाब स्थित आनन्द विहार आश्रम में रखी गई है।
यह रहेगा कार्यक्रम
संघ के जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकांत त्रिवेदी ने बताया कि स्वामी अवधेशानंद गिरिजी 7 मई को हरिद्वार से सडक़ मार्ग से प्रस्थानकर दिल्ली आएंगे और वहां से वायुयान द्वारा उदयपुर पहुंचेंगे। उदयपुर एयरपोर्ट से जूनापीठाधीश्वर सडक़ मार्ग से होते हुए शाम 4 बजे बांसवाड़ा पहुंचेंगे। कार्यक्रम संयोजक अनिल गुप्ता ने बताया कि 7 मई को शाम 5 बजे स्वामीजी का सत्संग एवं प्रवचन कार्यक्रम पीपलवा स्थित औद्योगिक प्रतिष्ठान में होगा। अगले दिन 8 मई को जूनापीठाधीश्वर प्रात: 9 बजे प्रभु प्रेमी संघ के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और अनुयायियों की बैठक को संबोधित करेंगे। इसी दिन 10 बजे श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। इसी दौरान उनकी पादुका पूजन एवं अन्य धार्मिक तथा आध्यात्मिक कार्यक्रम आनन्द विहार बायतालाब पर सम्पन्न होंगे।
गणेश मंदिर, त्रिपुर सुंदरी में करेंगे पूजा
प्रभुप्रेमी संघ के कोषाध्यक्ष जेपी मिश्रा ने बताया कि जूना पीठाधीश्वर 8 मई को दिन में 11 बजे तलवाड़ा पहुंचेंगे तथा सिद्धि विनायक गणपति मंदिर एवं सूर्य मंदिर में दर्शन तथा पूजा अर्चना करेंगे। स्वामीजी गणेशादित्य मंदिर विकास समिति के तत्वावधान में चल रहे मंदिर जीर्णोद्धार कार्य का अवलोकन भी करेंगे। यहां से वे शक्तिपीठ त्रिपुरा सुंदरी जाएंगे तथा आद्याशक्ति का विशेष अनुष्ठानकर देश की खुशहाली और समृद्धि के लिए पूजा अर्चना में सम्मिलित होंगे।
महाकुंभ के महाशीष की उत्सुकता
पिछले दिनों इलाहबाद में त्रिवेणी संगम पर सम्पन्न सदी के सबसे बड़े महाकुंभ में राष्ट्र की समग्र प्रगति एवं शक्ति संवर्धन के निमित्त प्रथम डूबकी लगाने के साथ ही त्रिवेणी संगम में 5 शाही स्नान के माध्यम से अथाह आध्यात्मिक महाऊर्जा संचित कर पहली बार लघुकाशी में यात्रा पर आ रहे जूना पीठाधीश्वर से महाकुंभ का महाशीष प्राप्त करने के दुर्लभ अवसर को लेकर श्रद्धालुओं में अपार उत्सुकता और उल्लास बना हुआ है। उल्लेखनीय होगा कि जूना पीठाधीश्वर की बांसवाड़ा जिले में अब तक 5 भागवत कथाएं हो चुकी है तथा विभिन्न अवसरों पर बांसवाड़ावासियों के साथ अपनत्व और आध्यात्मिक शक्ति संवर्धन में स्वामीजी का इस लघुकाशी पर विशेष अनुग्रह रहा है। प्रभुप्रेमी संघ ने दो दिवसीय यात्रा कार्यक्रम की कार्ययोजना बनाकर व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी है।
अलौकिक छवि और अद्भुत अभिव्यक्ति करती है मुग्ध
जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज निवर्तमान शंकरचार्य स्वामी सत्यमित्रानंदजी महाराज के शिष्य है। उनकी अलौकिक छवि और अद्भुत अभिव्यक्ति हर आयु, वर्ग तथा बौद्धिक श्रेणी के श्रोता श्रद्धालु को मुग्ध करती है। उनकी वाणी में जहां गंगा की धारा प्रवाह आभासित होता है वहीं कलम में कालिंदी की नीरनिधि पाठक को अध्यात्मक के अथाह समुद्र में गोते लगाने को आकर्षित करती है। देश और दुनिया में स्वामीजी के प्रवचन और साहित्य के श्रोताओं और पाठकों का लाखों की संख्या में एक विशिष्ट समूह है, जो उनके सत्संग का पुण्यार्जन अर्जन करने देश में हज़ारों किलोमीटर की दूरी और विदेश से सात समन्दर पार कर भी आयोजन स्थल पर पहुंचने में चूक नहीं करता।
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