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Thursday, July 11, 2013

‘खूबियों से भरी कुछ खास, भंवर सर की क्लास’

‘खूबियों से भरी कुछ खास, भंवर सर की क्लास’
- प्राथमिक शिक्षक की अनुकरणीय पहल
- बच्चों के लिए खुद के बूते किया इंतजाम

बांसवाड़ा। सरकारी विद्यालय में पढ़ाई के शिकवे-शिकायत को लेकर निजी विद्यालय में जाने के मामले तो सुने, पढ़े और देखे होंगे लेकिन बांसवाड़ा जिले का एक प्राथमिक विद्यालय ऐसा भी है जहां के गुणात्मक स्तर से प्रभावित होकर अभिभावक अपने बच्चों को निजी विद्यालयों से निकालकर यहां दाखिला दिला रहे है। यह विद्यालय है बांसवाड़ा जिले की घाटोल पंचायत समिति का प्राथमिक विद्यालय बड़लिया। अभिभावकों को इस दिशा में प्रेरित करने में यहां कार्यरत प्राथमिक शिक्षक भंवरलाल गर्ग की काबिले तारीफ भूमिका रही है। गर्ग जो रचनात्मक शिक्षण के लिए राज्य में संचालित क्रियेटीव टीचर ऑफ राजस्थान की बांसवाड़ा जिला टीम के कम्प्यूटर एक्सपर्ट एवं तकनीकि दल के सदस्य भी है। उन्होने अपने स्तर पर प्रोजेक्टर सुविधा युक्त मोबाईल का इंतजाम करके एक ऐसी शिक्षण विधा को अपनाया है, जिससे ग्रामीण विद्यार्थियों में न केवल पढ़ाई के प्रति रूझान बढ़ रहा है बल्कि विद्यालय में प्रतिदिन के साथ पूरा समय ठहराव भी सुनिश्चित हुआ है। विद्यालय का नया सत्र शुरू होने के साथ उन्होने इस तकनीक को अपनाना शुरू कर दिया है नतीजतन पूरे गांव के अभिभावकों और बच्चों की जुबां पर इन दिनों एक ही जुमला सुनाइ देता है - खूबियों से भरी हुई कुछ खास है, भंवर सर की क्लास।
अधिकारियों की टीम पहुंची बड़लिया
बांसवाड़ा। प्राथमिक विद्यालय बड़लिया में कार्यरत कम्प्यूटर दक्ष शिक्षक भंवरलाल गर्ग द्वारा आधुनिक तकनीक के जरिए प्राथमिक स्तर पर शिक्षण के बारे में चर्चा एवं जानकारी मिलने के बाद प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी महेन्द्र त्रिवेदी, सर्व शिक्षा अभियान अतिरिक्त परियोजना समन्वयक डॉ. हरिशंकर मारू तथा घाटोल ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नवीनचंद्र मीणा बुधवार को आकस्मिक निरीक्षण के तौर पर बड़लिया पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होने शिक्षक गर्ग को अपने अलग ही अंदाज में पहली कक्षा के बच्चों को प्रोजेक्टर और मोबाईल में प्राथमिक शिक्षण के लिए अपलोड की गई सामग्री के जरिए अध्यापन कराते हुए देखा। उन्होने लगभग 20 मिनिट तक गर्ग की कक्षा एवं उनके शिक्षण में मनोयोग से डूबे पहली कक्षा के ग्रामीण विद्यार्थियों को देखा तो स्वयं भी अभिभूत हुए बिना नहीं रह सके। शिक्षण के दौरान गर्ग ने प्रोजेक्टर के माध्यम से इन विद्यार्थियों को हिन्दी वर्णमाला के ज्ञान में तकनीक और कौशल का जिस प्रकार से इस्तमाल करते हुए शिक्षण कराया तो उच्चाधिकारी कक्षा में सीखने की जिज्ञासा में पूरी तरह से तल्लीन विद्यार्थियों की एकाग्रता को सराहे बिना न रह सके। शिक्षण में गर्ग ने छात्र अध्यापक क्रिया को भी बखूबी अंजाम दिया। गीत शैली में वर्णमाला लिखने, पढऩे और सुनने के अभ्यास का बच्चों पर कुछ ही देर में ऐसा असर हुआ कि वाल्यूम ऑफ कर देने पर बच्चे चित्र देखकर खुद ही गा कर सुनाने लगे।
चुनौती यूं बनी चाहत
बांसवाड़ा। प्राथमिक विद्यालय बड़लिया में 12 विद्यार्थी कुछ निजी विद्यालयों से निकलकर प्रवेश पाने वालों में शामिल है। इस सत्र में इन विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बड़ी उम्मीदों से यहां के सरकारी स्कूल में उन्हे भर्ती कराया। विद्यालय के संस्था प्रधान हरेन्द्र सिंह सिसोदिया ने प्राईवेट स्कूल से निकलकर आए विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की उम्मीद पर खरे उतरने के लिए अपने विद्यालय के कम्प्यूटर तकनीक में निपुण शिक्षण भंवर गर्ग से चर्चा की। उन्होने इस बात को महसूस किया कि यदि इन बच्चों को पूर्व में अध्ययनरत विद्यालय के अनुरूप स्तर की शिक्षा नहीं दी जाएगी तो वे न तो विद्यालय में बने रहेंगे और न ही सरकारी स्कूल की छवि के बारे में अभिभावकों और बच्चों के मन में सकारात्मक सोच बनेगी। संस्थाप्रधान और शिक्षक दोनो के लिए यह उम्मीद चुनौती बन गई थी। गर्ग ने इस चुनौती को चाहन में तब्दील कर दिया और निजी स्तर पर प्रोजेक्टर की सुविधायुक्त मोबाईल खरीदकर एक ऐसी तकनीक से शिक्षण से शुरू किया ताकि निजी विद्यालय से अपने विद्यालय में पढऩे के लिए आए बच्चों को गुणात्मक स्तर बेहतरीन बना रहे। चुनौती को जहां चाह वहां राह परिवर्तित करने में संस्थाप्रधान सिसोदिया और शिक्षक गर्ग की भूमिका को ग्रामीण और निरीक्षण कर चुके अधिकारी दिल खोल कर सराहते है।
सीटीओआर का प्रोत्साहन
राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद के आयुक्त एवं क्रियेटिव टीचर ऑफ राजस्थान के संस्थापक भास्कर ए. सांवत के निर्देशन में राज्य के 33 जिलों में सीटीओआर नामक टीम काम कर रही है। शिक्षकों की यह एक ऐसी टीम है जो प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक में विद्यार्थियों को ई-कंटेंट के जरिए शिक्षण में सहायता करती है। बड़लिया के प्राथमिक शिक्षक भंवर गर्ग इस टीम के जिला सदस्य है और पिछले दिनों बांसवाड़ा में सीटीओआर की राज्य प्रभारी डी. कविता के निर्देशन में ई-कंटेंट पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में प्रशिक्षण भी पा चुके है। इसी से प्रेरणा लेकर उन्होने अपने विद्यालय में पहली से पांचवी तक के शिक्षण में कंप्यूटर तकनीक और प्रोजेक्टर के साथ ई-कंटेट को शुरूआती विद्यार्थी जीवन से ही लाभान्वित करने का बीड़ा उठाया है। उनकी इस पहल को सराहा जा रहा है। वे स्वयं कहते है सीटीओआर से जुडऩे के कारण उन्हे नई तकनीक और ई-कंटेंट से प्राथमिक स्तर पर शिक्षण के साथ बच्चों में प्रारंभिक काल से ही इस तकनीक के प्रति रूझान पैदा करने की प्रेरणा मिली है। प्राथमिक विद्यालय बड़लिया में मोबाईल में उपलब्ध प्रोजेक्टर के कई फायदे महसूस किए गए है। अमूमन बड़ी तकनी के प्रोजेक्टर के लिए बिजली, युपीएस, बैटरी आदि की अनिवार्यता रहती है लेकिन मोबाईल में प्रयुक्त प्रोजक्टर के लिए इन सभी चीजों के लिए मोहताज नहीं रहना पड़ता। मोबाईल की बैटरी एक घंटे शिक्षण के लिए पर्याप्त ऊर्जा प्रदान करती है। इस सुविधा के कारण बिजली न होने और युपीएस तथा बैटरी का अभाव भी कक्षा शिक्षण को बाधित नहीं करता है। 
आयुक्त देखेंगे यह क्लास
क्रियेटीव टीचर ऑफ राजस्थान की राज्य प्रभारी डी. कविता तथा बांसवाड़ा डूंगरपुर के जिला प्रभारी प्रकाश पंड्या ने बताया कि प्राथमिक स्तर पर पूरे प्रदेश के लिए बड़लिया स्कूल की इस अनुकरणीय पहल के बारे में एस.एस.ए. आयुक्त भास्कर ए. सावंत को जानकारी दी गई है। उन्होने विद्यालय के संस्थाप्रधान और शिक्षक को इस अभिनव पहल के लिए बधाई दी है तथा ऑनलाईन इस प्रकारण के कक्षा शिक्षण के अवलोकन की इच्छा जताई है। रीडिंग कैंपेन के दौरान आयुक्त ने कभी भी बड़लिया प्राथमिक स्कूल में प्रोजेक्टर से शिक्षण की क्लास देखे जाने के बारे में सीटीओआर के पदाधिकारियों को निर्देशित किया है।
 







1 comment:

surjeet said...

umda prayas, tabhi abhi ummid baki hai.