द्रव/द्रव्य या हो कोई तरल इसे कोई कहां बांध पाया है?
जब कभी भी इंसान से द्रव्य बांधने की कोशिश की है तो उस बांध के पृष्ठभाग में द्रव्य/तरल का विस्तार अथाह राशि के रूप में ही हुआ है और जब कभी भी बांध कमजोर हुआ है, जल निरन्तर चलायमान गति अनुसार आगे बढ़ा है नदिया के रूप में अपने साजन सागर से मिलने। बांध में बंधे होने के दौरान उसे नहरों के माध्यम से खेतों तक पहुंचाने का काम कर खेती के उपयोग में लिया जाता रहा है लेकिन उसकी मंजिल कुछ और होती है और उसे इस ओर धकेल दिया जाता है।
यदि शारीरिक द्रव्य का संचय कर अधोमुखी होने के स्थान पर उर्द्धवमुखी किया जाए तो व्यक्ति का नवनिर्माण हो जाता है। यह योग के माध्यम से ही संभव है।
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