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Monday, November 8, 2010

जब मोदक पर मोहित होते है महादेव


मंशा चौथ व्रत उद्यापन पर प्रकाशनार्थ

जब मोदक पर मोहित होते है महादेव

भंवर गर्ग
बांसवाड़ा, 8 नवंबर। आम तौर पर तो सभी देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए विशेष भोग लगाने की धार्मिक परंपरा रही है। इसी के चलते सभी देवी-देवताओं को निर्धारित भोग ही लगाया जाता है। जनमान्यता है कि प्रथम पू'य भगवान गणपति को मोदक का प्रसाद प्रिय है लेकिन वागड़ प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाने वाले मंशाचौथ व्रत के अनुसार कार्तिक सुदी चौथ के दिन व्रतीजन शिवजी को मोदक का भोग लगाते है और प्रसाद के रूप में अपने बंधु-बांधवों को बांटते है।

समाजवाद के पोषक है भगवान शिव

जन सामान्य से लेकर छोटे जीव तक तो प्रसाद के दिया जाता है। मंशा चौथ की व्रत कथा के अनुसार व्रतीजन को व्रत उद्यापन के दिन निर्धारित मात्रा में मिश्रण तैयार किया जाता है, जिसके अनुसार दो किलो (चार सेर आटा)गेहूं का मोटा आटा, पांच सौ ग्राम (सेर गुड़) गुड़ व 6 सौ ग्राम (सवा सेर गाय का घी)शुद्ध घी के मिश्रण बनाकर इसके चार भाग किए जाते है। इसके एक भाग को तो प्रसाद के रूप में लोगों में वितरित किया जाता है। एक भाग चिटींयों को, एक भाग ग्वाले को तो एक भाग गर्भवती महिलाओं को वितरित किया जाता है। यह व्रत शिवजी के समाजवाद की पोषकता का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

अगाध आस्था का केन्द्र है शिव

वागड़ क्षेत्र के बांसवाड़ा जिले में इस व्रत के प्रति आमजन की अगाध आस्था के कारण ही जिला कलक्टर द्वारा इस दिन अवकाश रखा जाता है। इस दिन वाग्वरांचल के शिवालयों को बड़े ही आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। प्रभातकाल से ही व्रतीजन शिवलयों में जाकर व्रत के उद्यापन से पूर्व शिवलिंग के पूजन अर्चन एवं व्रत कथा श्रवण करने के उपरांत विधि विधान से उद्यापन किया जाता है।

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