‘सबसे पहले पूरे करे अधूरे काम’
ः भँवरलाल गर्ग
हर व्यक्ति को समय समान रूप से मिला हुआ होता है। हर व्यक्ति को रोज़ 24 घंटे या यूं कहे कि 86, 400 क्षण ही मिलते है। फिर भी इतना समय व्यतीत होने के बाद कोई खुश में तो कोई नाखुश रहता है। अगले दिन भी अपनी नियमित चर्या के अनुसार जीवन जीने के बाद भी शाम को परिणाम वही मिलता है लेकिन फास्ट लाईफ स्टाईल के नाम पर इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
यदि समय रहते समय प्रबंधन का गुर सिख लिया जाए तो जीवन में खुशियां आने का क्रम निरंतर बना रहता है। इसके लिए जरूरी यह है कि समय का प्रबंधन किस प्रकार करते है। साथ ही किन कार्यों को प्रमुखता से लेकर आगे बढ़ते है।
व्यक्ति द्वारा निर्धारित किए गए मापदंड और उन पैमानों के अनुसार यदि वह चलता है एवं परेशानी होती है तो उसे शीघ्र ही इस पर विचार करना चाहिए। समय प्रबंधन के लिए सबसे पहले उन कार्यों को शीघ्र निबटाए जो बार-बार आपके मन में आकर आपको विचलित करते है। ये अधूरे पड़े कार्य व्यक्ति को दूसरे काम करने में मन लगने नहीं देते है। इसी कारण वह न तो जो नये काम सोचता है वह शुरू कर पाता है और ना ही पुराने अधुरे पड़े कार्यों को पूर्ण कर पाता है। इस कारण मन निरंतर परेशानी में पड़ा रहता है। समय प्रबंधन करने से जीवन प्रबंधन होने के साथ जीवन सुखमय हो जाता है।

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