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Thursday, February 6, 2014

‘हर बार के हाँ को कहे ना’


‘हर बार के हाँ को कहे ना’
ः भँवरलाल गर्ग
‘यस सर’ के युग में नो कहे तो विफलता मिलेगी इस डर से हर कोई हाँ में हाँ मिलाता जाता है और इसी कारण परेशानियां भी पीछा नहीं छोड़ती है। कभी ना कहने की हिम्मत भी जूटा लेनी चाहिए।
पहले का समय और था जब हर कोई किसी की सहायता करता था और खुश भी रहता था। आज का युग बहुत बदल कर आगे निकल गया है। समय के साथ लोग बदल गए है। इस कारण किसी काम में सहयोग के लिए पूछना पड़ता है कि क्या मेरी सहायता करोगे? इसमें भी सभी हाँ तो कह देते है लेकिन काम पड़ने पर समयाभाव में सहायता नहीं कर पाते है।
यदि निर्णय लेकर ना कहने की हिम्मत भी जूटा ले तो परेशानियों से बचा जा सकता है। विवेकपूर्ण निर्णय लेकर ही हामी भरने से समय, श्रम और स्वास्थ्य तीनों अच्छे रहते है। कभी किसी को ना कहने पर थोड़ा असहजता तो होती ही है लेकिन बाद की परेशानियों से बचा जा सकता है।
युग के साथ आदतों में भी परिवर्तन लाना पड़ता है। यस मैन के दौर में थोड़ा ना कहने की भी जरूरत है लेकिन यदि फिर केवल ना कहने की ही आदत पड़ जाए फिर तो ऊपरवाला ही मालिक है।
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