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Sunday, June 3, 2012

स्ट्रगल और सफलता एक साथ

स्ट्रगल और सफलता एक साथ
एकजूटता है कामयाबी का मंत्र
बांसवाड़ा। कहते है सफलता कड़ी मेहनत और ऊपरवाले के आशीर्वाद बिना नहीं मिलती है लेकिन देने वाला जब भी देता, देता छप्पर फाड़ के। कुछ ऐसा ही वाकया जनजाति बाहुल्य बांसवाड़ा के तीन मित्रों के साथ हुआ। इनकी दोस्ती की मिसाल, संघर्ष काल व एक साथ मिली सफलता इनकी एकजूटता का पर्याय बन गई है। इन दिनों में इन तीन मित्रों को मिली सफलता सबकी जुबान पर है। किसी फिल्मी कहानी सी लगने वाली यह दासतां हकीकत है। बांसवाड़ा जिले की गढ़ी तहसील के निकट बोरी गांव निवासी नितीन/भगवतीलाल खराड़ी, ठीकरिया निवासी खुशपाल/नटवरलाल गर्ग तथा परतापुर के निकट रहने वाले जगदीश चंद्र/अमरूजी डामोर एक जिले के निवासी होते हुए भी आज से लगभग 7 साल पहले एक-दूसरे को नहीं जानते थे लेकिन जब स्नातक करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए जिले से बाहर गए तो संभाग मुख्यालय उदयपुर में इनका परिचय हुआ जो गहरी दोस्ती में बदला और बाद में यह तीनों एक ही कमरे में साथ-साथ रहने लगे। इन्होंने इनका अध्ययन व संघर्ष एक साथ ही किया। उदयपुर व जयपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हमेशा एक कमरे में साथ ही रहे।
स्ट्रगल और सफलता एक साथ
जब इनका संघर्ष एक साथ रहा तो ईश्वर ने सफलता की सौगात भी सत्र 2012 में एक साथ दी। नितीन खराड़ी का चयन कनिष्ठ वाण्ज्यििक अधिकारी के रूप में उदयपुर में हुआ है तो खुशपाल गर्ग का चयन मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय में अंग्रेजी विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में हुआ है। जगदीश चंद्र डामोर का चयन अंग्रेजी विषय के व्याख्याता पद पर हुआ है।
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