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Wednesday, May 9, 2018

विचार शृंखला = बांध से भी नहीं बंधता तरल . . !


द्रव/द्रव्य या हो कोई तरल इसे कोई कहां बांध पाया है?


जब कभी भी इंसान से द्रव्य बांधने की कोशिश की है तो उस बांध के पृष्ठभाग में द्रव्य/तरल का विस्तार अथाह राशि के रूप में ही हुआ है और जब कभी भी बांध कमजोर हुआ है, जल निरन्तर चलायमान गति अनुसार आगे बढ़ा है नदिया के रूप में अपने साजन सागर से मिलने। बांध में बंधे होने के दौरान उसे नहरों के माध्यम से खेतों तक पहुंचाने का काम कर खेती के उपयोग में लिया जाता रहा है लेकिन उसकी मंजिल कुछ और होती है और उसे इस ओर धकेल दिया जाता है।

यदि शारीरिक द्रव्य का संचय कर अधोमुखी होने के स्थान पर उर्द्धवमुखी किया जाए तो व्यक्ति का नवनिर्माण हो जाता है। यह योग के माध्यम से ही संभव है।

Monday, May 7, 2018

विचार शृंखला = शरीर मर्यादा


शौचादि से निवृत्ति के पश्चात जब तक मैं अपना बायां हाथा मांज नहीं लेता तब तक उस हाथ से कोई काम नहीं करता। उसके बाद भी भोजन करने या पूजाआदि शूचिता युक्त कार्य संपादित करने में बायां हाथ काम में लेने में मन गवाही नहीं भरता लेकिन मेरा बायां हाथ हर अच्छे, बुरे कार्य में मेरे शरीर का साथ देता ही है। मेरे बायें हाथ को चोट लगे तो उसके घाव पर दायें हाथ से ही मरहम लगता हूं। अधिक दर्द होने पर मेरी आँखों में आंसू भी आते है। मुख दर्द के मारे पुकारकर इस और ध्यान आकर्षित करता है। मैं उसकी दवाई करवाता ही हूं। जब शरीर पर वस्त्र धारण करता हूं तो भी बायें हाथ को पूरी तरह ढकता हूं चाहे कोई भी मौसम हो बायें हाथ को उस मौसम अनुसार वस्त्र पहनाता हूं। मेरा बायां हाथा भी अपना कार्य पूरी निष्ठा से करता है। शरीर के सभी अंगों की भांति मेरा बायां हाथ मेरे शरीर का महत्त्वपूर्ण अंग है। यदि किसी दिन मेरा बायां हाथ मेरे शरीर से कटकर अलग हो जाएगा तो मुझे जो नारकीय जीवन जीना पड़ेगा उसकी कल्पना भी मुझसे नहीं हो पा रही।

विचार शृंखला = जरूरी होती है व्यवस्था

वर्तमान की कर्म व्यवस्था में कोई शिक्षक बनता है तो कोई पटवारी, कोई ग्राम सेवक, कोई चिकित्सक, कोई कलेक्टर, कोई इंजीनियर, कोई डाॅक्टर तो कोई कुछ बनता है। यह बनने के लिए उस व्यक्ति को उस कार्य का ज्ञाता होना आवश्यक है। कोई चिकित्सक किसी कलेक्टर का कार्य नहीं कर सकता है। अपवाद हो सकता है कि कोई दो कार्यों को संपादित करने में समान प्रतिभा रखता हो लेकिन उसकी प्रामाणिक योग्यता जिस पद के लिए होगा तथा वर्तमान शासन व्यवस्था के नियमों में जिस पद पर स्थापित होगा वह वही कहलाएगा। एक उदाहरण देना यहां लाजमी समझता हूं कि विगत दिनों बांसवाड़ा में डाॅक्टर्स की हड़ताल के दौरान बांसवाड़ा एसडीएम ने चिकित्सा व्यवस्थाओं को अपने हाथ में लिया था यह उनकी दोहरी प्रतिभा का प्रमाण है परन्तु वे कहे तो एसडीएम ही जाएंगे। बस यही बातें वैदिक काल की वर्ण व्यवस्था पर भी लागू होती है।

Tuesday, May 1, 2018

ज्ञानी-बुद्धिजीवी, सदा-सर्वदा पूज्य

हमारे देश में ज्ञानी, बुद्धिजीवी सदा, सर्वदा पूज्य रहे हैं और उनके द्वारा ही श्रेष्ठ कर्म संपादित हुए है। जब संविधान नहीं था तब भी ज्ञानीनाम अग्रगण्यम डॉ. भीमराव अम्बेडकर को संविधान निर्मात्री सभा का अध्यक्ष बनाया गया था। संविधान तो उनके द्वारा बाद में लिखा गया था लेकिन आज यह बताने की कोशिश की जा रही है कि संविधान निर्माण के बाद ही सबको समान लाने की दिशा में कार्य किए जा रहे है जबकि सत्य यह है कि जातिबंधन कभी नहीं रहे जो ज्ञानी है उसे बड़ी से बड़ी जिम्मेदारियां तब भी दी गई थी और अब भी दी जाती है। - भंवर गर्ग, ठीकरिया

Sunday, November 1, 2015

. . . तो हो जाएंगे भाव कम !

वर्तमान में खाद्यान्न की निरन्तर बढ़ती किमतों को लेकर परेशान वही लोग है जो पूर्व में कृषि भूमि बेच चुके या सरकारी नियमों के कारण सरकार को दे चुके है। क्योंकि एक समय ऐसा था जब हमारा देश 100 प्रतिशत कृषि पर आधारित था लेकिन निरन्तर बदलती सोच और हावी होती आधुनिकता ने लोगों को अपनी ओर आकृष्ट किया और फिर वहां भी कुछ नहीं मिला। पता अब चला कि इन सब सुख सुविधाओं के बावजूद भी खाद्यान्न तो जरूरी है लेकिन ये समझ आते-आते देर हो चुकी है एवं खाद्यान्न महंगे हो चुके है।
अब यदि देश को कृषि प्रधान देश बना दिया जाए तो हमारी मूलभुत आवश्यकताएं (रोटी कपड़ा और मकान) पूरी हो जाएगी लेकिन तब यह हो-हल्ला मचाने की जरूरत न पड़े कि देखों कि उस देश के लोग तो ऐसा खाते है, ऐसा पहनते है व ऐसे मकानों में रहते है। हां हमें हमारी मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति जरूर हो जाएगी। पेट भर जाएगा पेटी नहीं भरेगी।

Sunday, July 27, 2014

स्वामी रामदेव आएंगे बांसवाड़ा

स्वामी रामदेव आएंगे बांसवाड़ा
बांसवाड़ा, 28 जुलाई। शहर के समीपवर्ती गांव ठीकरिया निवासी भंवरलाल गर्ग ने योगऋषि स्वामी रामदेव को हरिद्वार के पतंजलि योगपीठ में चल रही सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं की कार्यशाला के दूसरे दिन योग सत्र के आरंभ में बांसवाड़ा आने का न्यौता दिया। जिस पर उन्होंने वर्ष 2015 में बांसवाड़ा आने की बात कही।
गर्ग का हुआ सम्मान
रामदेवजी के निर्देशन में पतंजलि योगपीठ, भारत स्वाभिमान व स्वदेशी   विचारों को नई दिशा देने में भूमिका अदा करने वाले देशभर के सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं की ‘की-बोर्ड क्रांतिकारियों की कार्यशाला’ के दूसरे दिन देश के प्रमुख कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बांसवाड़ा जिले के ठीकरिया गांव निवासी भंवरलाल गर्ग को स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण, पतंजलि योगपीठ, भारत स्वाभिमान, योग, आयुर्वेद एवं स्वदेशी विचारों को सोशल मीडि़या द्वारा प्रचार प्रसार योगऋषि रामदेवजी ने रूद्राक्ष की माला पहनाकर आशिष दिया।
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Thursday, February 6, 2014

‘हर बार के हाँ को कहे ना’


‘हर बार के हाँ को कहे ना’
ः भँवरलाल गर्ग
‘यस सर’ के युग में नो कहे तो विफलता मिलेगी इस डर से हर कोई हाँ में हाँ मिलाता जाता है और इसी कारण परेशानियां भी पीछा नहीं छोड़ती है। कभी ना कहने की हिम्मत भी जूटा लेनी चाहिए।
पहले का समय और था जब हर कोई किसी की सहायता करता था और खुश भी रहता था। आज का युग बहुत बदल कर आगे निकल गया है। समय के साथ लोग बदल गए है। इस कारण किसी काम में सहयोग के लिए पूछना पड़ता है कि क्या मेरी सहायता करोगे? इसमें भी सभी हाँ तो कह देते है लेकिन काम पड़ने पर समयाभाव में सहायता नहीं कर पाते है।
यदि निर्णय लेकर ना कहने की हिम्मत भी जूटा ले तो परेशानियों से बचा जा सकता है। विवेकपूर्ण निर्णय लेकर ही हामी भरने से समय, श्रम और स्वास्थ्य तीनों अच्छे रहते है। कभी किसी को ना कहने पर थोड़ा असहजता तो होती ही है लेकिन बाद की परेशानियों से बचा जा सकता है।
युग के साथ आदतों में भी परिवर्तन लाना पड़ता है। यस मैन के दौर में थोड़ा ना कहने की भी जरूरत है लेकिन यदि फिर केवल ना कहने की ही आदत पड़ जाए फिर तो ऊपरवाला ही मालिक है।
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Wednesday, February 5, 2014

‘सबसे पहले पूरे करे अधूरे काम’

‘सबसे पहले पूरे करे अधूरे काम’
ः भँवरलाल गर्ग
हर व्यक्ति को समय समान रूप से मिला हुआ होता है। हर व्यक्ति को रोज़ 24 घंटे या यूं कहे कि 86, 400 क्षण ही मिलते है। फिर भी इतना समय व्यतीत होने के बाद कोई खुश में तो कोई नाखुश रहता है। अगले दिन भी अपनी नियमित चर्या के अनुसार जीवन जीने के बाद भी शाम को परिणाम वही मिलता है लेकिन फास्ट लाईफ स्टाईल के नाम पर इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
यदि समय रहते समय प्रबंधन का गुर सिख लिया जाए तो जीवन में खुशियां आने का क्रम निरंतर बना रहता है। इसके लिए जरूरी यह है कि समय का प्रबंधन किस प्रकार करते है। साथ ही किन कार्यों को प्रमुखता से लेकर आगे बढ़ते है।
व्यक्ति द्वारा निर्धारित किए गए मापदंड और उन पैमानों के अनुसार यदि वह चलता है एवं परेशानी होती है तो उसे शीघ्र ही इस पर विचार करना चाहिए। समय प्रबंधन के लिए सबसे पहले उन कार्यों को शीघ्र निबटाए जो बार-बार आपके मन में आकर आपको विचलित करते है। ये अधूरे पड़े कार्य व्यक्ति को दूसरे काम करने में मन लगने नहीं देते है। इसी कारण वह न तो जो नये काम सोचता है वह शुरू कर पाता है और ना ही पुराने अधुरे पड़े कार्यों को पूर्ण कर पाता है। इस कारण मन निरंतर परेशानी में पड़ा रहता है। समय प्रबंधन करने से जीवन प्रबंधन होने के साथ जीवन सुखमय हो जाता है।

Tuesday, August 27, 2013

‘‘. . . देवी जिसने श्रीकृष्ण की रक्षा की ’’ नौनिहालों की रक्षा करने वाली दैवी: नंदिनी माता

‘‘. . . देवी जिसने श्रीकृष्ण की रक्षा की ’’
नौनिहालों की रक्षा करने वाली दैवी: नंदिनी माता
- भँवरलाल गर्ग, ठीकरिया
बांसवाड़ा। हर देवालय के प्रति लोगों की अगाध आस्था का अपना-अपना कारण और नज़रिया होता है। भक्त भी अपने आराध्य को अलग-अलग रूप में देखने की इच्छा रखते है तथा उसी अनुरूप पूजा अर्चना करते है। कोई देवता तो कोई मातृ शक्ति तो कोई पितृ शक्ति के रूप में तो कोई सखा तो कोई प्रेमी के रूप में पूजता है। बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से 16 किलोमीटर दूर बड़ोदिया गांव के निकट विशाल पर्वत की चोटी पर स्थित मंदिर में स्थापित नंदिनी माता को बालक-बालिकाओं की रक्षा करने वाली दैवी के रूप में पूजा जाता है।
नंदिनी माता मंदिर पर शारदीय व चैत्र नवरात्रि की भांति ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मेले सा माहौल रहता है। जनमान्यता है कि नंदिनी माता ने भगवान श्रीकृष्ण की जन्म के समय रक्षा की थी। श्रीदुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय में उल्लेख है कि-
‘नंद गोप गृह जाता, यशोदा गर्भ संभवा
तत्स्तो नाशयिष्यामि, विन्ध्याचल निवासीनी’ (श्लोक नं. 42) 
श्रीकृष्ण जन्म कथा में भी वर्णन है कि जब कृष्ण का जन्म हुआ था उसी समय माता यशोदा ने भी बालिका को जन्म दिया था। वासुदेव जब यमुना नदी पार कर नंद बाबा के घर पहुंचे तथा कंस द्वारा कैद, देवकी के आठवे पुत्र के हाथों कंस वध की भविष्यवाणी आदि की कहानी जब सुनाकर कृष्ण को अपने पास सुरक्षित रखने की बात कही तो नंदबाबा ने अपने घर जन्मी बालिका को वासुदेव को सौपा और कहा कि वासुदेव तुम इस बालिका को ले जाओ। कंस बालिका होने के कारण इसे नहीं मारेगा। जब वासुदेव मथुरा आए और अगली सुबह कंस को पता चला की उसकी बहन देवकी के आठवी संतान हुई है तो वह कारागृह में गया। जहां देवकी और वासुदेव के कहने पर की भविष्णवाणी में कहा गया था कि देवकी की आठवी संतान कंस का वध करेगी लेकिन यह तो बालिका है। इस पर कंस ने कहा कि मैं तो इसे केवल देखना चाहता हूं। यह कहकर वह उस बालिका को हाथ में लेकर खिलखिलाकर हंसने लगा और कहने लगा वासुदेव और देवकी मैं कोई मुर्ख नहीं कि अपनी मौत को बचा रहने दूं तथा उस बालिका को दोनो हाथों से उठाकर शिला पर पटकने के लिए फैंका लेकिन योगमाया हवा में यह कहते हुए उड़ गई कि तू मुझे मारेगा कंस तुझे मारने वाला तो गोकुल में खेल रहा है।
यही योगमाया शक्ति वायु मार्ग से होकर अरावली पर्वतमाला स्थापित हो गई। जनश्रुति है कि बड़ोदिया के निकट बिखरी पर्वतमाला की चोटी पर नंदबाबा की बेटी योगमाया शक्ति नंदिनी माता का मंदिर है।
इसी कारण दैवी श्री कृष्ण को बचाने वाली माता कहा जाता है। इस मान्यता के चलते ही वागड़ में सबसे पहले इसी पहाड़ी पर होलिका दहन होता है तथा इसके बाद में क्षेत्र के गांवों में होलिका दहन होता है तथा ढूढोत्सव से पूर्व नौनिहालों की रक्षा करने के उद्देश्य से माता-पिता दैवी नंदिनी माता की ओर मुखकर शिश नवाते है।


फोटो एक: दैवी नंदिनी माता की प्रतिमा।



फोटो दो:अरावली पर्वतमाला स्थित नंदिनी माता का मंदिर।



फोटो तीन: बड़ोदिया गांव स्थित अरावली पर्वतमाला की पहाड़ी जिस पर नंदिनी माता का मंदिर अवस्थित है।
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Monday, August 26, 2013

Thursday, July 11, 2013

‘खूबियों से भरी कुछ खास, भंवर सर की क्लास’

‘खूबियों से भरी कुछ खास, भंवर सर की क्लास’
- प्राथमिक शिक्षक की अनुकरणीय पहल
- बच्चों के लिए खुद के बूते किया इंतजाम

बांसवाड़ा। सरकारी विद्यालय में पढ़ाई के शिकवे-शिकायत को लेकर निजी विद्यालय में जाने के मामले तो सुने, पढ़े और देखे होंगे लेकिन बांसवाड़ा जिले का एक प्राथमिक विद्यालय ऐसा भी है जहां के गुणात्मक स्तर से प्रभावित होकर अभिभावक अपने बच्चों को निजी विद्यालयों से निकालकर यहां दाखिला दिला रहे है। यह विद्यालय है बांसवाड़ा जिले की घाटोल पंचायत समिति का प्राथमिक विद्यालय बड़लिया। अभिभावकों को इस दिशा में प्रेरित करने में यहां कार्यरत प्राथमिक शिक्षक भंवरलाल गर्ग की काबिले तारीफ भूमिका रही है। गर्ग जो रचनात्मक शिक्षण के लिए राज्य में संचालित क्रियेटीव टीचर ऑफ राजस्थान की बांसवाड़ा जिला टीम के कम्प्यूटर एक्सपर्ट एवं तकनीकि दल के सदस्य भी है। उन्होने अपने स्तर पर प्रोजेक्टर सुविधा युक्त मोबाईल का इंतजाम करके एक ऐसी शिक्षण विधा को अपनाया है, जिससे ग्रामीण विद्यार्थियों में न केवल पढ़ाई के प्रति रूझान बढ़ रहा है बल्कि विद्यालय में प्रतिदिन के साथ पूरा समय ठहराव भी सुनिश्चित हुआ है। विद्यालय का नया सत्र शुरू होने के साथ उन्होने इस तकनीक को अपनाना शुरू कर दिया है नतीजतन पूरे गांव के अभिभावकों और बच्चों की जुबां पर इन दिनों एक ही जुमला सुनाइ देता है - खूबियों से भरी हुई कुछ खास है, भंवर सर की क्लास।
अधिकारियों की टीम पहुंची बड़लिया
बांसवाड़ा। प्राथमिक विद्यालय बड़लिया में कार्यरत कम्प्यूटर दक्ष शिक्षक भंवरलाल गर्ग द्वारा आधुनिक तकनीक के जरिए प्राथमिक स्तर पर शिक्षण के बारे में चर्चा एवं जानकारी मिलने के बाद प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी महेन्द्र त्रिवेदी, सर्व शिक्षा अभियान अतिरिक्त परियोजना समन्वयक डॉ. हरिशंकर मारू तथा घाटोल ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नवीनचंद्र मीणा बुधवार को आकस्मिक निरीक्षण के तौर पर बड़लिया पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होने शिक्षक गर्ग को अपने अलग ही अंदाज में पहली कक्षा के बच्चों को प्रोजेक्टर और मोबाईल में प्राथमिक शिक्षण के लिए अपलोड की गई सामग्री के जरिए अध्यापन कराते हुए देखा। उन्होने लगभग 20 मिनिट तक गर्ग की कक्षा एवं उनके शिक्षण में मनोयोग से डूबे पहली कक्षा के ग्रामीण विद्यार्थियों को देखा तो स्वयं भी अभिभूत हुए बिना नहीं रह सके। शिक्षण के दौरान गर्ग ने प्रोजेक्टर के माध्यम से इन विद्यार्थियों को हिन्दी वर्णमाला के ज्ञान में तकनीक और कौशल का जिस प्रकार से इस्तमाल करते हुए शिक्षण कराया तो उच्चाधिकारी कक्षा में सीखने की जिज्ञासा में पूरी तरह से तल्लीन विद्यार्थियों की एकाग्रता को सराहे बिना न रह सके। शिक्षण में गर्ग ने छात्र अध्यापक क्रिया को भी बखूबी अंजाम दिया। गीत शैली में वर्णमाला लिखने, पढऩे और सुनने के अभ्यास का बच्चों पर कुछ ही देर में ऐसा असर हुआ कि वाल्यूम ऑफ कर देने पर बच्चे चित्र देखकर खुद ही गा कर सुनाने लगे।
चुनौती यूं बनी चाहत
बांसवाड़ा। प्राथमिक विद्यालय बड़लिया में 12 विद्यार्थी कुछ निजी विद्यालयों से निकलकर प्रवेश पाने वालों में शामिल है। इस सत्र में इन विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बड़ी उम्मीदों से यहां के सरकारी स्कूल में उन्हे भर्ती कराया। विद्यालय के संस्था प्रधान हरेन्द्र सिंह सिसोदिया ने प्राईवेट स्कूल से निकलकर आए विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की उम्मीद पर खरे उतरने के लिए अपने विद्यालय के कम्प्यूटर तकनीक में निपुण शिक्षण भंवर गर्ग से चर्चा की। उन्होने इस बात को महसूस किया कि यदि इन बच्चों को पूर्व में अध्ययनरत विद्यालय के अनुरूप स्तर की शिक्षा नहीं दी जाएगी तो वे न तो विद्यालय में बने रहेंगे और न ही सरकारी स्कूल की छवि के बारे में अभिभावकों और बच्चों के मन में सकारात्मक सोच बनेगी। संस्थाप्रधान और शिक्षक दोनो के लिए यह उम्मीद चुनौती बन गई थी। गर्ग ने इस चुनौती को चाहन में तब्दील कर दिया और निजी स्तर पर प्रोजेक्टर की सुविधायुक्त मोबाईल खरीदकर एक ऐसी तकनीक से शिक्षण से शुरू किया ताकि निजी विद्यालय से अपने विद्यालय में पढऩे के लिए आए बच्चों को गुणात्मक स्तर बेहतरीन बना रहे। चुनौती को जहां चाह वहां राह परिवर्तित करने में संस्थाप्रधान सिसोदिया और शिक्षक गर्ग की भूमिका को ग्रामीण और निरीक्षण कर चुके अधिकारी दिल खोल कर सराहते है।
सीटीओआर का प्रोत्साहन
राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद के आयुक्त एवं क्रियेटिव टीचर ऑफ राजस्थान के संस्थापक भास्कर ए. सांवत के निर्देशन में राज्य के 33 जिलों में सीटीओआर नामक टीम काम कर रही है। शिक्षकों की यह एक ऐसी टीम है जो प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक में विद्यार्थियों को ई-कंटेंट के जरिए शिक्षण में सहायता करती है। बड़लिया के प्राथमिक शिक्षक भंवर गर्ग इस टीम के जिला सदस्य है और पिछले दिनों बांसवाड़ा में सीटीओआर की राज्य प्रभारी डी. कविता के निर्देशन में ई-कंटेंट पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में प्रशिक्षण भी पा चुके है। इसी से प्रेरणा लेकर उन्होने अपने विद्यालय में पहली से पांचवी तक के शिक्षण में कंप्यूटर तकनीक और प्रोजेक्टर के साथ ई-कंटेट को शुरूआती विद्यार्थी जीवन से ही लाभान्वित करने का बीड़ा उठाया है। उनकी इस पहल को सराहा जा रहा है। वे स्वयं कहते है सीटीओआर से जुडऩे के कारण उन्हे नई तकनीक और ई-कंटेंट से प्राथमिक स्तर पर शिक्षण के साथ बच्चों में प्रारंभिक काल से ही इस तकनीक के प्रति रूझान पैदा करने की प्रेरणा मिली है। प्राथमिक विद्यालय बड़लिया में मोबाईल में उपलब्ध प्रोजेक्टर के कई फायदे महसूस किए गए है। अमूमन बड़ी तकनी के प्रोजेक्टर के लिए बिजली, युपीएस, बैटरी आदि की अनिवार्यता रहती है लेकिन मोबाईल में प्रयुक्त प्रोजक्टर के लिए इन सभी चीजों के लिए मोहताज नहीं रहना पड़ता। मोबाईल की बैटरी एक घंटे शिक्षण के लिए पर्याप्त ऊर्जा प्रदान करती है। इस सुविधा के कारण बिजली न होने और युपीएस तथा बैटरी का अभाव भी कक्षा शिक्षण को बाधित नहीं करता है। 
आयुक्त देखेंगे यह क्लास
क्रियेटीव टीचर ऑफ राजस्थान की राज्य प्रभारी डी. कविता तथा बांसवाड़ा डूंगरपुर के जिला प्रभारी प्रकाश पंड्या ने बताया कि प्राथमिक स्तर पर पूरे प्रदेश के लिए बड़लिया स्कूल की इस अनुकरणीय पहल के बारे में एस.एस.ए. आयुक्त भास्कर ए. सावंत को जानकारी दी गई है। उन्होने विद्यालय के संस्थाप्रधान और शिक्षक को इस अभिनव पहल के लिए बधाई दी है तथा ऑनलाईन इस प्रकारण के कक्षा शिक्षण के अवलोकन की इच्छा जताई है। रीडिंग कैंपेन के दौरान आयुक्त ने कभी भी बड़लिया प्राथमिक स्कूल में प्रोजेक्टर से शिक्षण की क्लास देखे जाने के बारे में सीटीओआर के पदाधिकारियों को निर्देशित किया है।
 







Thursday, June 27, 2013

बांसवाड़ा जिला जेल में बीके पंचमसिंह का व्याख्यान

‘सजा से शरीर दोषमुक्त होती है, आत्मा नहीं’
जिला जेल में बीके पंचमसिंह का व्याख्यान
बांसवाड़ा, 27 जून। किसी गलती अथवा दोष के लिए मिलने वाली सजा से शरीर चाहे दोषमुक्त हो जाता हो लेकिन हमारा अपना जो मूल स्वरूप आत्मा है वह दोषमुक्त नहीं होती है। यदि आत्मा को दोषमुक्त बनाना है तो सबसे पहले खुद से खुद की मुलाकात करनी होगी। इस दिशा में ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के जगह-जगह चलने वाले केन्द्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। यह विचार डकैत से अध्यात्म की राह पर आए ब्रह्मकुमार पंचमसिंह ने गुरुवार को बांसवाड़ा जिला कारागार में आयोजित व्याख्यान में व्यक्त किए। उन्होने कहा कि वे खुद 550 डाकूओं के गिरोह के सरदार थे और किसी समय में चंबल में उनके नाम का खौफ था लेकिन अपराधबोध के कारण मन में शांति नहीं थी जबकि धर्म, कर्म, पूजा-पाठ खूब करता था। जब ईश्वरीय साक्षात्कार के कारण ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ज्ञान प्रकाश ने जीवन को नई दिशा दी। इस अवसर पर जिला उपअधीक्षक भैरोसिंह शेखावत, बांसवाड़ा केन्द्र प्रभारी बीके सरोज दीदी, बीके कमला दीदी, बीके किशोर भाई आदि मौजुद थे।
परिस्थितियां मजबूत और अनुभवी बनाती है
व्याख्यान के दौरान बीके पंचमसिंह ने कहा कि व्यक्ति परिस्थितिवश क्रिया करता है जो अविवेक के कारण अपराध भी कर बैठता है। अत: परिस्थितियां व्यक्ति को अनुभवी बनाती है कि फिर कभी पूर्व में किया गया अपराध अथवा दोष नहीं दोहराऊंगा और यह संकल्प व्यक्ति को मजबूत बनाता है। उन्होने कहा कि जीवन में मर्यादा को पालन जरूरी है। बिना पवित्रता से भक्ति से भी शक्ति नहीं मिलती है। भला करेंगे तो खुद को भी भलाई मिलेगी। बीके कमला दीदी ने ‘कर सको तो खुद की महसूस करो गलतियो तो शिक्षक है यह जिन्दगी . . .’ कविता सुनाई। बीके सरोज दीदी ने कहा कि जीवन में मूल्यों की स्थापना करना तथा उन्हे जीवन पर्यंत पालन करना व्यक्ति को दानव से मानव और मानव से देवता बनाता है। बीके किशारे भाई ने कहा कि जो व्यक्ति जैसा बीज बोता है वैसे ही वृक्ष के फल खाता है। अंत में जिला जेल उप अधीक्षक भैरोसिंह शेखावत ने आभार जताया।

फोटो - बांसवाड़ा जिला कारागार में आयोजित ब्रह्मकुमार पंचमसिंह के व्याख्यान में मंचस्थ अतिथियों में जिला जेल उप अधीक्षक भैरोसिंह शेखावत, बीके सरोज दीदी, बीके कमला दीदी, बीके किशोर भाई तथा व्याख्यान सुनते कैदी।
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Friday, May 24, 2013

बांसवाड़ा शहर में शिक्षकों के लिए टीएलएम सामग्री निर्माण के केन्द्र

बांसवाड़ा शहर में शिक्षकों के लिए टीएलएम सामग्री निर्माण के केन्द्र

Wednesday, May 22, 2013

जतन . . .

जतन . . .

कड़ी धूप में भी आने वाले बारिश के मौसम की पूर्व तैयारी में कवेलूओं का रख-रखाव करते हुए दम्पत्ति

Monday, May 13, 2013

जल देता जीवन . . .

जल देता जीवन . . .
(फोटो संख्या 1 व 2) : बहारों के मौसम में फूलों पर मंडराकर रसपान करना जितना सरल, उतना ही कठिन तपन भरी दुपहरी में सुखे गले को तर करने का जतन करना। फिर भी हेंडपंप से छिपी बुदों से गला तर करती मधुमक्खियां।


(फोटो संख्या 3) : वन क्षेत्र से शहर की ओर आया वानरों का दल हेंडपंप के पास रखे जलकुंड से पानी पीकर प्यासा बुझाता हुआ।
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